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जोलि पंचायत के धुर विरोधी चौधरी और शहजाद आए एक साथ

Thu, 10 May 2018 11:44 PM IST
Updated Thu, 10 May 2018 11:44 PM IST
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जोलि पंचायत के धुर विरोधी चौधरी और शहजाद आए एक साथ
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हरिद्वार।
पिछले सात सालों से जिला पंचायत में अध्यक्ष पद के लिए लड़ाई लड़ने वाले चौधरी राजेंद्र सिंह और पूर्व विधायक मौ. शहजाद एक साथ आ गए हैं। दोनों के एक साथ आने से राजनीति गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। बृहस्पतिवार को जिला पंचायत में हुई बोर्ड बैठक में जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद सत्तार और पूर्व अध्यक्ष अंजुम बेग के आने के बाद लोग हैरत में पड़ गए। दोनों ने जिला पंचायत को सफल तरीके से संचालन की बात कही है।
जिला पंचायत हरिद्वार में चौधरी राजेंद्र सिंह 1995 से सक्रिय हैं। चौधरी 1995 में बसपा के कैडर से जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए और पांच साल तक संचालन किया। सन 2000 में अध्यक्ष सीट आरक्षित हो गई, लेकिन फिर भी चौधरी गुट से अध्यक्ष बनीं। इसके बाद राज्य गठन होने के बाद जिला पंचायत में कई अध्यक्ष बनेे और बोर्ड भंग होते रहे। कई बार समितियां बनी तो कई बार जिलाधिकारी प्रशासक बनकर संचालन करते रहे।
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जिला पंचायत की राजनीति में 2011 में पूर्व विधायक मौ. शहजाद सक्रिय हो गए और उनके छोटे भाई की पत्नी अंजुम बेग ने चौधरी राजेंद्र सिंह की पत्नी कुसुम देवी को हराते हुए अध्यक्ष पद काबिज कर लिया। इस चुनाव में मौ. शहजाद को भाजपा सरकार का भरपूर सहयोग मिला था। इसके बाद राज्य में सन 2012 में कांग्रेस की सरकार बनी और अंजुम बेग को विभिन्न आरोपों में 30 सितंबर-2015 को निलंबित करते हुए अधिकार सीज कर दिए। उनके अधिकार सीज होने के बाद राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय समिति बनाई, जिसमें चौधरी राजेंद्र सिंह की पत्नी कुसुम देवी, विजयपाल और ताहिर हसन सदस्य बने। इससे दोनों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अधिक बढ़ गई। इसके बाद अगले बोर्ड गठन के लिए हुए चुनाव में चौधरी राजेंद्र सिंह के छोटे भाई अशोक की पत्नी सविता चौधरी और पूर्व विधायक मौ. शहजाद के भाई मौ. सत्तार का अध्यक्ष पद के लिए आमना-सामना हो गया, लेकिन ऐन वक्त पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने मौ. सत्तार का नामांकन वापस करा दिया और भाजपा का सहयोग लेेने के आरोप में मौ. शहजाद को पार्टी से निकाल दिया। इससे सविता चौधरी निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गई। इस दौरान 2017 में फिर से भाजपा की सरकार आई और कुछ सदस्यों की शिकायत पर सविता चौधरी के अधिकार पांच दिसंबर-2017 को सीज कर दिए। इस दौरान जिला पंचायत के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय समिति में विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की पत्नी रानी देवयानी सिंह के साथ मौ. सत्तार और अमीलाल वाल्मीकि को नियुक्त कर दिया। समिति का विवाद पूरी चर्चाओं में रहा। करीब चार महीने चले प्रकरण में हाईकोर्ट ने 12 मार्च को सविता चौधरी के अधिकार बहाल कर दिए और 20 दिन बाद वित्तीय अधिकारी भी बहाल कर दिए। इसके बाद हुई दूसरी बैठक में बृहस्पतिवार को मौ. शहजाद के भाई मौ. सत्तार के साथ पूर्व अध्यक्ष अंजुम बेग भी बोर्ड बैठक में शामिल हुई तो जनता के सामने चौधरी राजेंद्र सिंह और मौ. शहजाद के मिलने की खबर ने हैरत में डाल दिया।
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चौधरी राजेंद्र बोले कि अब होगा विकास
चौधरी राजेंद्र सिंह ने कहा कि मौ. शहजाद और उनके भाइयों ने जिला पंचायत में बोर्ड के साथ आकर अच्छी पहल की है। अब सभी एकमत होकर विकास कार्योँ को आगे बढ़ाएंगे। विवादों के झमेले में पड़े रहने से विवाद, एक दूसरे को शहमात देने के चक्कर में पड़े रहने से विकास कार्य बाधित होते रहे। अब सभी के सहयोग से समस्त क्षेत्रों में विकास कार्य होंगे और समय की बर्बादी से बचकर उलझनों से दूर रहकर समुचित कार्य कराते हुए योजनाओं को धरातल पर उतारेंगे।
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हम विकास के साथ हैं: शहजाद
पूर्व विधायक मौ. शहजाद ने कहा कि उनके छोटे भाई मौ. सत्तार और छोटे भाई की पत्नी अंजुम बेग को जनता से चुनकर जिला पंचायत में भेजा है तो विकास कार्यों के लिए बोर्ड बैठकें में जाएंगे। चौधरी राजेंद्र के साथ उनकी कोई निजी लड़ाई नहीं हैं, बल्कि पड़ोसी भी हैं। जो राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है, वह ग्रुपबाजी की है, जोकि जारी रहेगी। अब जब जिला पंचायत अध्यक्ष के अधिकार कोर्ट ने बहाल कर दिए है तो पंचायत के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और सफल संचालित करने को एक साथ हैं। जिसने (कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन) उन्हें दो बार धोखा दे दिया है, उसके साथ तीसरी बार नहीं जाएंगे। पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में नामांकन पत्र में प्रस्तावक बनकर और हाल में बनी संचालन समिति में मौ. सत्तार का विरोध करने के प्रकरण रहा।

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सदस्यों से वार्ता करने के बाद होगी इस्तीफा पर कार्रवाई
हरिद्वार। मानकपुर आदमपुर सीट से जिला पंचायत सदस्य बबली चौधरी का इस्तीफा जिला पंचायत कार्यालय को मिल गया है। इसकी पुष्टि अपर मुख्य अधिकारी राजीव कुमार नाथ त्रिपाठी ने की। जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी ने बताया कि इस्तीफा मिलने की सूचना मिली है, पूरे प्रकरण पर बोर्ड के सदस्यों एवं अधिकारियों से वार्ता करने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई करेंगे।
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