{"_id":"5b8977c542c792465326a7a6","slug":"21535735749-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रशिया में विभिन्न कार्यक्रम कर लौटे शांतिकुंज प्रतिनिधि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रशिया में विभिन्न कार्यक्रम कर लौटे शांतिकुंज प्रतिनिधि
Updated Fri, 31 Aug 2018 10:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। रूस के 15 दिवसीय प्रवास के दौरान विभिन्न कार्यक्रम संपन्न कराने के बाद शांतिकुंज के प्रतिनिधि डा. ज्ञानेश्वर मिश्र और जयराम मोटलानी स्वदेश लौट आए हैं।
शांतिकुंज के प्रतिनिधियों ने मास्को में आयोजित इंडिया डे फेस्टिवल के दौरान आयोजित यज्ञ कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही मास्को के प्रसिद्ध पार्क सकोलनिकि में नौ रशियन जोड़ों का वैदिक पद्धति से विवाह संस्कार संपन्न कराए। इस दौरान डा. ज्ञानेश्वर मिश्र ने रशियन भाषा में दांपत्य जीवन के पवित्र रिश्ते का अर्थ बताते हुए वैदिक कर्मकांड संपन्न कराया। अनेक युवाओं ने भी भारतीय पद्धति से अपना विवाह संस्कार संपन्न कराने की बात कही। इंडिया डे फेस्टिवल में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और डा. प्रणव पंड्या रचित साहित्य का रशियन में अनुवादित पुस्तकों का स्टाल भी लगाया गया। शांतिकुंज की ओर से संचालित रचनात्मक कार्यक्रम और यज्ञीय आयोजन से रशियन युवा भारतीय संस्कृति, ोग व आयुर्वेद की ओर आकर्षित हुए।
रशियन न्यू युनिवर्सिटी एवं फाइनेंस यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी डिपार्टमेंट में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के साथ मिलकर कार्य करने की योजना पर चर्चा हुई। देसंविवि के कुलाधिपति डा. प्रणव पंड्या के प्रवास पर शैक्षणिक अनुबंध होने पर सहमति बनी। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति व युग निर्माण मिशन के साहित्य को युवाओं के बीच पहुंचाने के लिए अलग से टीम बनाई गई। जिसमें इंडियन बिजनेस एलाइंस के एडवाइजरी बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य एडी कोटवानी और दिनेश कलवानी प्रमुख सदस्य होंगे। रशियन युवाओं में भारतीय संस्कृति के प्रति बढ़ते रुझान के लिए भारतीय राजदूत पंकज शरण ने गायत्री परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार का युवाओं को संस्कारित करने का काम सराहनीय है।
विज्ञापन
शांतिकुंज प्रतिनिधियों ने स्वदेश लौटने पर डा. प्रणव पंड्या और शैलदीदी से मुलाकात की। डा. पंड्या ने कहा कि गायत्री परिवार का कार्य लोगों में सकारात्मक विचार के साथ समाज के विकास में काम करना है। युवा पीढ़ी को संस्कारित कर उन्हें परिवार व समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना है।
हरिद्वार। रूस के 15 दिवसीय प्रवास के दौरान विभिन्न कार्यक्रम संपन्न कराने के बाद शांतिकुंज के प्रतिनिधि डा. ज्ञानेश्वर मिश्र और जयराम मोटलानी स्वदेश लौट आए हैं।
शांतिकुंज के प्रतिनिधियों ने मास्को में आयोजित इंडिया डे फेस्टिवल के दौरान आयोजित यज्ञ कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही मास्को के प्रसिद्ध पार्क सकोलनिकि में नौ रशियन जोड़ों का वैदिक पद्धति से विवाह संस्कार संपन्न कराए। इस दौरान डा. ज्ञानेश्वर मिश्र ने रशियन भाषा में दांपत्य जीवन के पवित्र रिश्ते का अर्थ बताते हुए वैदिक कर्मकांड संपन्न कराया। अनेक युवाओं ने भी भारतीय पद्धति से अपना विवाह संस्कार संपन्न कराने की बात कही। इंडिया डे फेस्टिवल में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और डा. प्रणव पंड्या रचित साहित्य का रशियन में अनुवादित पुस्तकों का स्टाल भी लगाया गया। शांतिकुंज की ओर से संचालित रचनात्मक कार्यक्रम और यज्ञीय आयोजन से रशियन युवा भारतीय संस्कृति, ोग व आयुर्वेद की ओर आकर्षित हुए।
विज्ञापन
रशियन न्यू युनिवर्सिटी एवं फाइनेंस यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी डिपार्टमेंट में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के साथ मिलकर कार्य करने की योजना पर चर्चा हुई। देसंविवि के कुलाधिपति डा. प्रणव पंड्या के प्रवास पर शैक्षणिक अनुबंध होने पर सहमति बनी। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति व युग निर्माण मिशन के साहित्य को युवाओं के बीच पहुंचाने के लिए अलग से टीम बनाई गई। जिसमें इंडियन बिजनेस एलाइंस के एडवाइजरी बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य एडी कोटवानी और दिनेश कलवानी प्रमुख सदस्य होंगे। रशियन युवाओं में भारतीय संस्कृति के प्रति बढ़ते रुझान के लिए भारतीय राजदूत पंकज शरण ने गायत्री परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार का युवाओं को संस्कारित करने का काम सराहनीय है।
विज्ञापन
शांतिकुंज प्रतिनिधियों ने स्वदेश लौटने पर डा. प्रणव पंड्या और शैलदीदी से मुलाकात की। डा. पंड्या ने कहा कि गायत्री परिवार का कार्य लोगों में सकारात्मक विचार के साथ समाज के विकास में काम करना है। युवा पीढ़ी को संस्कारित कर उन्हें परिवार व समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना है।