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संतों के सानिध्य में ही व्यक्ति चरित्रवान बनता है-स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी
Updated Wed, 29 Aug 2018 11:40 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। जयराम आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि संतों के सानिध्य में ही व्यक्ति के उत्तम चरित्र का निर्माण होता है। वह भूपतवाला स्थित मंगल आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी मंगलानंद सरस्वती महाराज की 37वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा क संतों का जीवन समाज के मार्गदर्शन के लिए समर्पित रहता है।
अध्यक्षता कर रहे डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी मंगलानंद सरस्वती महाराज एवं स्वामी लक्ष्यानंद सरस्वती महाराज त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। जिन्होंने अपनी विद्वता और तपस्या से भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के स्वरूप को विश्व पटल पर प्रस्तुत किया और अपना संपूर्ण जीवन भारतीय परंपराओं के उत्थान के लिए समर्पित किया। मंगल आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी सुरेशानंद सरस्वती महाराज ने ब्रह्मलीन स्वामी मंगलानंद महाराज को दिव्य व्यक्तित्व बताया। इस अवसर पर अश्विनी शर्मा, प्रदीप गुप्ता, सुनील तुषानियां एवं मांगेराम अत्री ने कार्यक्रम में पधारे सभी संत महापुरुषों का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान सतपाल ब्रह्मचारी, देवानंद सरस्वती, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरिचेतनानंद, स्वामी ऋषि रामकृष्ण, महंत मोहनदास रामायणी, स्वामी जगदीशानंद, स्वामी चिद्विलासानंद, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, स्वामी दिनेश दास, महंत दुर्गादास, स्वामी ओमस्वरूप, माता सुनहरी देवी, श्रीमहंत आराधना गिरी, महंत अष्टकौशल गिरी आदि उपस्थित रहे।
हरिद्वार। जयराम आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि संतों के सानिध्य में ही व्यक्ति के उत्तम चरित्र का निर्माण होता है। वह भूपतवाला स्थित मंगल आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी मंगलानंद सरस्वती महाराज की 37वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा क संतों का जीवन समाज के मार्गदर्शन के लिए समर्पित रहता है।
अध्यक्षता कर रहे डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी मंगलानंद सरस्वती महाराज एवं स्वामी लक्ष्यानंद सरस्वती महाराज त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। जिन्होंने अपनी विद्वता और तपस्या से भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के स्वरूप को विश्व पटल पर प्रस्तुत किया और अपना संपूर्ण जीवन भारतीय परंपराओं के उत्थान के लिए समर्पित किया। मंगल आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी सुरेशानंद सरस्वती महाराज ने ब्रह्मलीन स्वामी मंगलानंद महाराज को दिव्य व्यक्तित्व बताया। इस अवसर पर अश्विनी शर्मा, प्रदीप गुप्ता, सुनील तुषानियां एवं मांगेराम अत्री ने कार्यक्रम में पधारे सभी संत महापुरुषों का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान सतपाल ब्रह्मचारी, देवानंद सरस्वती, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरिचेतनानंद, स्वामी ऋषि रामकृष्ण, महंत मोहनदास रामायणी, स्वामी जगदीशानंद, स्वामी चिद्विलासानंद, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, स्वामी दिनेश दास, महंत दुर्गादास, स्वामी ओमस्वरूप, माता सुनहरी देवी, श्रीमहंत आराधना गिरी, महंत अष्टकौशल गिरी आदि उपस्थित रहे।
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