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धान की पछेती फसल का लाभ उठाएं किसान
Updated Thu, 28 Jun 2018 10:52 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
धनौरी। धान की पछेती नर्सरी डालने को लेकर किसानों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। जो किसान धान की अगेती प्रजातियों की नर्सरी डालने से चूक गए हैं वह धान की पछेती प्रजाति की नर्सरी डालकर फसल उत्पादन कर सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा. पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि फिलहाल धान की पछेती नर्सरी डालने का उचित समय चल रहा है। किसान 1509 बासमती और सरबती धान की नर्सरी डाल सकते हैं। इस प्रजाति की नर्सरी की पौध की बुआई 15 जुलाई से शुरू होगी।
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उन्होंने बताया कि जून के प्रथम सप्ताह मे धान की उन्नतशील प्रजाति पंत बासमती एक एपीआर 118 ए पंत धान दस, पंत धान बारह की अगेती प्रजातियो की नर्सरी की पौध तैयार हो चुकी है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि किसान मानकों के अनुसार खेत मे देशी खाद व सिंचाई का उपयोग कर नर्सरी डालें। इसके साथ ही धान मे लगने वाले खैरा रोग की रोकथाम के लिए नर्सरी डालते समय जिंक सल्फेट की 30 किलोग्राम प्रति हेक्टयर की दर से बुआई के समय खेत मे डालें। साथ ही धान के बीज को वाईस्टीन नामक दवा को 2 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीज शोधक करके नर्सरी मे डालनी चाहिए। केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डा. उजाला सिंह ने बताया कि किसान किसी भी फसल को बोने से पहले खेत कि मिट्टी की जांच कृषि विज्ञान केंद्र पर निशुल्क करा सकते हैं। किसान किसी भी कृषि संबंधित जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
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