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दो महीने बाद अब खुली हवा में सांस लेगी धर्मनगरी
Updated Fri, 29 Jun 2018 10:52 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। ज्येष्ठ के दो महीने धर्मनगरी में रही लाखों यात्रियों का जमावड़ा रहा। अब एक महीना खुली हवा में सांस लेने का अवसर आया है। अब 27 जुलाई तक एक बार फिर से मंदी का सीजन चलेगा। 27 को गुरु पूर्णिमा के साथ ही बम-बम का महीना फिर से शुरू हो जाएगा।
श्रावण मास 28 जुलाई को लगेगा। तब तक आषाढ़ मास में यात्रियों का आगमन कम ही रहेगा। जून के अंतिम सप्ताह से शिक्षण संस्थाओं के खुलने का दौर भी शुरू हो चुका है। आषाढ़ मास हमेशा कम भीड़ भाड़ वाला रहा है। पुरुषोत्तम मास ज्येष्ठ के महीने दो बार पड़ने से धर्मनगरी में काफी भीड़ रही। शुक्रवार को हरिद्वार नगरी कुछ खाली-खाली नजर आई। ज्येष्ठ मास के लिए आए यात्रियों की वापसी लगातार चल रही है। इस महीने नए यात्रियों का आगमन कम रहेगा। केवल कर्मकांड़ करने के लिए श्रद्घालु हरिद्वार पहुंचेंगे। 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर्व पर एक बार फिर से भारी भीड़ आएगी। 28 जुलाई को श्रावण लग जाएगा। 14 दिनों में लाखों की संख्या में कांवड़ियों के आगमन की उम्मीद है। देश के विभिन्न राज्यों में हरिद्वार से ले जाया गया गंगाजल 13 और 14 अगस्त को चढ़ाया जाएगा। जो श्रद्घालु त्रयोदशी तिथि को मानते हैं वे 13 अगस्त को जल चढ़ाएंगे। शिव चौदस पर अभिषेक करने वाले 14 अगस्त को जलाभिषेक करेंगे। पिछले कुछ दशकों पहले तक गंगाजल केवल त्रयोदशी का चढ़ता था। अब नए दौर में जल चढ़ाने का कार्य भी दो दिनों में संपन्न होता है। राजस्थान में जलाभिषेक त्रयोदशी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चर्तुदशी के दिन किया जाएगा।
हरिद्वार। ज्येष्ठ के दो महीने धर्मनगरी में रही लाखों यात्रियों का जमावड़ा रहा। अब एक महीना खुली हवा में सांस लेने का अवसर आया है। अब 27 जुलाई तक एक बार फिर से मंदी का सीजन चलेगा। 27 को गुरु पूर्णिमा के साथ ही बम-बम का महीना फिर से शुरू हो जाएगा।
श्रावण मास 28 जुलाई को लगेगा। तब तक आषाढ़ मास में यात्रियों का आगमन कम ही रहेगा। जून के अंतिम सप्ताह से शिक्षण संस्थाओं के खुलने का दौर भी शुरू हो चुका है। आषाढ़ मास हमेशा कम भीड़ भाड़ वाला रहा है। पुरुषोत्तम मास ज्येष्ठ के महीने दो बार पड़ने से धर्मनगरी में काफी भीड़ रही। शुक्रवार को हरिद्वार नगरी कुछ खाली-खाली नजर आई। ज्येष्ठ मास के लिए आए यात्रियों की वापसी लगातार चल रही है। इस महीने नए यात्रियों का आगमन कम रहेगा। केवल कर्मकांड़ करने के लिए श्रद्घालु हरिद्वार पहुंचेंगे। 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर्व पर एक बार फिर से भारी भीड़ आएगी। 28 जुलाई को श्रावण लग जाएगा। 14 दिनों में लाखों की संख्या में कांवड़ियों के आगमन की उम्मीद है। देश के विभिन्न राज्यों में हरिद्वार से ले जाया गया गंगाजल 13 और 14 अगस्त को चढ़ाया जाएगा। जो श्रद्घालु त्रयोदशी तिथि को मानते हैं वे 13 अगस्त को जल चढ़ाएंगे। शिव चौदस पर अभिषेक करने वाले 14 अगस्त को जलाभिषेक करेंगे। पिछले कुछ दशकों पहले तक गंगाजल केवल त्रयोदशी का चढ़ता था। अब नए दौर में जल चढ़ाने का कार्य भी दो दिनों में संपन्न होता है। राजस्थान में जलाभिषेक त्रयोदशी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चर्तुदशी के दिन किया जाएगा।
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