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‘धान की पछेती नर्सरी डालने के लिए सावधानी की जरूरत’
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ब्यूरो/अमर उजाला, धनौरी
धान की पछेती नर्सरी डालने को लेकर किसानों को बेहद सावधानी बरतने की आवश्यकता है, जो किसान धान की अगेती प्रजातियों की नर्सरी डालने से चूक गए हैं। वे यह नर्सरी डालकर फसल उत्पादन कर सकते हैं। ये बातें कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने कहीं।
उन्होंने बताया कि फिलहाल धान की पछेती नर्सरी डालने का उचित समय है। किसान 1509, बासमती और सरबती धान की नर्सरी डाल सकते हैं। इस प्रजाति की नर्सरी की पौध की बुआई करीब 15 जुलाई से शुरू होगी। उन्होंने बताया कि जून के प्रथम सप्ताह में धान की उन्नतशील प्रजाति पंत बासमती-1, पीआर-118, पंत धान-10, पंत धान-12 की अगेती प्रजातियों की नर्सरी की पौध तैयार हो चुकी है। किसान पछेती धान की बुआई कर धान की फसल का उत्पादन कर सकते हैं। वहीं, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि किसान मानकों के अनुसार, खेत में देशी खाद और सिंचाई का उपयोग कर नर्सरी डालें। इसके साथ ही धान में लगने वाले खैरा रोग की रोकथाम के लिए नर्सरी डालते समय जिंक सल्फेट की 30 किलोग्राम प्रति हेक्टयर की दर से बुआई के समय खेत में डालें। साथ ही धान के बीज को वाईस्टीन दवा को 2 ग्राम प्रति किलो ग्राम की दर से बीज शोधक करके नर्सरी में डालनी चाहिए। इससे उर्वरक क्षमता बढ़ती है। किसी भी फसल बोने से खेत की मिट्टी की जांच कृषि विज्ञान केंद्र पर निशुल्क करा सकते हैं। किसान किसी भी कृषि संबंधी जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
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धान की पछेती नर्सरी डालने को लेकर किसानों को बेहद सावधानी बरतने की आवश्यकता है, जो किसान धान की अगेती प्रजातियों की नर्सरी डालने से चूक गए हैं। वे यह नर्सरी डालकर फसल उत्पादन कर सकते हैं। ये बातें कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने कहीं।
उन्होंने बताया कि फिलहाल धान की पछेती नर्सरी डालने का उचित समय है। किसान 1509, बासमती और सरबती धान की नर्सरी डाल सकते हैं। इस प्रजाति की नर्सरी की पौध की बुआई करीब 15 जुलाई से शुरू होगी। उन्होंने बताया कि जून के प्रथम सप्ताह में धान की उन्नतशील प्रजाति पंत बासमती-1, पीआर-118, पंत धान-10, पंत धान-12 की अगेती प्रजातियों की नर्सरी की पौध तैयार हो चुकी है। किसान पछेती धान की बुआई कर धान की फसल का उत्पादन कर सकते हैं। वहीं, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि किसान मानकों के अनुसार, खेत में देशी खाद और सिंचाई का उपयोग कर नर्सरी डालें। इसके साथ ही धान में लगने वाले खैरा रोग की रोकथाम के लिए नर्सरी डालते समय जिंक सल्फेट की 30 किलोग्राम प्रति हेक्टयर की दर से बुआई के समय खेत में डालें। साथ ही धान के बीज को वाईस्टीन दवा को 2 ग्राम प्रति किलो ग्राम की दर से बीज शोधक करके नर्सरी में डालनी चाहिए। इससे उर्वरक क्षमता बढ़ती है। किसी भी फसल बोने से खेत की मिट्टी की जांच कृषि विज्ञान केंद्र पर निशुल्क करा सकते हैं। किसान किसी भी कृषि संबंधी जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
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