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तंगहाली से जूझ रहे थे रामदेव के गुरु
हरिद्वार/ब्यूरो
Updated Wed, 20 Feb 2013 01:17 PM IST
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ट्रस्ट के खाते से पैसा निकालने की पावर होने के बाद भी बाबा रामदेव के गुरु शंकर देव उधारी मांगने को मोहताज थे। आचार्य कर्मवीर के करीबी विपिन प्रधान ने पुलिस को बयान दिया है कि शंकर देव ने उनसे पांच हजार रुपये उधार लिए हैं। शंकर देव की तलाश के दौरान कनखल पुलिस ने आचार्य कर्मवीर के करीबी विपिन प्रधान से पूछताछ की थी।
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पूछताछ में विपिन प्रधान पुलिस को बताया कि आश्रम में भाई-भतीजावाद बढ़ गया था। जिसकी वजह से आचार्य कर्मवीर के साथ उन्होंने भी वर्ष 2004 में आश्रम छोड़ दिया। शंकर देव ने आश्रम से जाने से कुछ दिन पहले विपिन प्रधान से फोन कर पांच हजार रुपये मांगे थे। इसके लिए उन्होंने आचार्य कर्मवीर को सूचना देने को भी कहा था। लेकिन विपिन प्रधान ने खुद पांच हजार रुपये भिजवाने की बात कही है।
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कौन हैं विपिन प्रधान
विपिन प्रधान पुत्र चमन सिंह निवासी टिटौडा, थाना खतौली मुजफ्फरनगर के मूल निवासी हैं। कनखल के सर्व प्रिय विहार में किराए पर रहने वाले विपिन, आचार्य कर्मवीर के योग शिविर आदि का काम देखते हैं।
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गत्ता-बोरे बेचते थे शंकर देव
कृपालु बाग आश्रम से दिव्य फार्मेसी भी संचालित होती थी। जो बाद में हरिद्वार औद्योगिक क्षेत्र में शिफ्ट कर दी गई। आश्रम में मौजूद गत्ते के खाली बक्सों और बोरों को शंकर देव खुद कबाड़ी को बेचते थे। जो पैसा मिलता था उसे वह खुद रख लेते थे। अपने आखिरी दौर में शंकर देव तंगहाली से जूझ रहे थे।