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खाली पड़े घरों की सरकार लेगी जिम्मेदारी
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 07 Mar 2016 02:05 PM IST
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एक कार्यक्रम के दौरान हरीश रावत
- फोटो : file photo
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उत्तराखंड के कुमाऊं में गर्ब्याग से कुटी तक के छह गांवों के खाली पड़े घरों की जिम्मेदारी अब सरकार लेगी। दरअसल संस्कृति विभाग की ओर से 75 साल पुराने भवनों को संरक्षित किए जाने के लिए दोबारा सर्वे किया जा रहा है।
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इस बार इस सर्वे में ऐसे भवन भी शामिल कर लिए जाएंगे, जहां कोई नहीं रहता। सरकार अपने संरक्षण में लेकर ऐसे भवनों को संरक्षित कराएगी। इसके साथ ही जौनसार के रवाईं क्षेत्र के दो सौ साल पुराने घरों को जस का तस उठाकर दूसरी जगहों पर रखा जाएगा, जहां पर्यटक ऐसे घरों को देख सकें।
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संस्कृति विभाग की ओर से कुछ समय पहले इन 6 गांवों के सर्वे कराए गए। जिन घरों में लोग मिले या जिनके मालिकों का पता लग गया। उन घरों का चिन्हीकरण कर लिया गया। इसके साथ ही ऐसे घर छोड़ दिए गए, जहां कोई नहीं मिला। सरकार की ओर से ऐसे 75 साल पुरानी शैली में बने घरों को संरक्षित कर मालिकों को 50 हजार रुपये दिए जाने की योजना है।
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ये घर जैसे बने हैं, उन्हें उसी स्वरूप में संरक्षित किया जाएगा, ताकि यहां की परंपरा को बचाया जा सके। इसके साथ ही रवाईं क्षेत्र के दो सौ घरों को भी संरक्षित किया जा रहा है। उन्हें जस का तस उठाकर ऐसी जगहों पर रखे जाने की योजना बन रही है, जहां पर्यटक इन दो सौ साल पुराने घरों को देख सकें।
कुमाऊं में पहले तक छह गांव थे, लेकिन अब कुमाऊं का बूंदी गांव भी शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही रवाईं क्षेत्र में भी पुराने घर संरक्षित करने पर अब काम हो रहा है। रवाईं क्षेत्र के दो सौ घरों को जस का तस उठाकर ऐसी जगहों पर रखा जाएगा, जहां अधिक से अधिक पर्यटक उन्हें देख सकें। ऐसी जगह देखी जा रही है। इस संबंध में समिति गठित हो गई है, समिति ने पहली बैठक भी कर ली है।
- बीना भट्ट, निदेशक, संस्कृति विभाग
छह गांवों के इतने घरों का हुआ चिन्हीकरण
गर्ब्यांग- 7
नपच्यो- 5
गुंजी- 12
नाबी- 6
रौंगकांग- 7
कुटी- 10