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बंद होने के कगार पर सस्ती राशन की दुकान
महेश्वर प्रसाद सिंह / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 27 Mar 2016 02:45 PM IST
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राशन घोटाला
- फोटो : file photo
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उत्तराखंड में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें बंद होने के कगार पर हैं। कारण, विक्रेताओं को मिलने वाले कमीशन से ज्यादा उनका खर्च होना।
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करीब 80 प्रतिशत कोटेदारों के पास राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के 500 राशन कार्ड भी नहीं हैं। प्रत्येक दुकान पर राज्य खाद्य योजना से पांच लाख की आय वाले लोगों को निकाल देने से हजारों की संख्या में राशन कार्डों में कमी आई है। अब कोटेदारों ने राज्य खाद्य योजना में भी 143 रुपये प्रति कुंतल की दर से कमीशन और 30 से 35 हजार रुपये (खर्च निकाल कर) आय के स्त्रोत का सृजन करने की मांग की है।
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यदि राष्ट्रीय खाद्य योजना के तहत एक डीलर के पास 500 राशन कार्ड हैं और प्रत्येक कार्ड में चार यूनिट है, तो डीलर को गोदाम से 100 कुंतल राशन का आवंटन होता है, जिस पर 143 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से 14,300 रुपये कमीशन बनता है। इसके अलावा 200 खाली बोरी के 2000 रुपये मिलेंगे। महीने के कुल 15,300 रुपये हुए।
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जबकि चीनी पर कोटेदारों को कमीशन नहीं मिलता है। इतने रुपये में एक डीलर को एक माह तक खर्च चलाना होता है। जबकि कोटेदारों के दुकान, ट्रांसपोर्ट, लेबर और बिजली बिल का कुल मिलाकर 30 से 35 हजार रुपये बैठता है। डीलरों का कहना है कि पहले उनको ज्यादा राशन का आवंटन होता था, तो उनका औसत आ जाता था।
सामान अनुपात में राशन कार्ड बांटने की मांगे
राशन डीलरों का कहना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत जो राशन कार्ड बने हैं, उनका वितरण ठीक ढंग से नहीं किया गया है। कुछ राशन डीलरों के पास अधिक कार्ड है तो कुछ के पास सौ भी नहीं है। उन्होंने मांग है कि सामना अनुपात में राशन कार्ड को बांटा जाए। ताकि सभी को इसका लाभ मिल सके।
मेरी स्वयं की दुकान पर राष्ट्रीय खाद्य योजना के सिर्फ 66 कार्ड हैं। ऐसे में आप अनुमान लगा सकते हैं, कि कितना कमीशन मिलता होगा। जबकि राशन की दुकान राजा रोड बाजार में है, जहां प्रतिमाह 30 हजार रुपये दुकान का किराया है। खाद्य सचिव को ज्ञापन भेजकर एनएफएस की भांति ही राज्य सरकार की अन्य योजनाओं में भी 143 रुपये प्रति कुंतल की दर से कमीशन निर्धारित किया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कुछ समय बाद डीलर दुकान बंद करने को मजबूर हो जाएंगे।
- जितेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, उत्तराखंड सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद
राज्य खाद्य योजना के राशन कार्ड के नवीनीकरण के दौरान काफी संख्या में कार्ड निरस्त किए जा रहे हैं। आने वाले समय में डीलरों को दिक्कत तो होगी ही, हालांकि डीलरों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर विभाग उस पर काम कर रहा है।
- पीएस पांगती, जिलापूर्ति अधिकारी