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यहां है सोने की खान लेकिन एक कानून ने रोकी खुदाई!
अमर उजाला/दीपक उप्रेती, पिथौरागढ़
Updated Fri, 18 Oct 2013 09:46 PM IST
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उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के डौडियाखेड़ा गांव में एक साधु के सपने को आधार मानते हुए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) की टीम खुदाई का काम तो कर रही है, लेकिन अस्कोट के बड़ीगांव में प्रत्यक्ष रूप से सोना तथा अन्य कीमती धातुओं के मिलने की पुष्टि के बावजूद कनाडा की पेवलक्रीक माइनिंग और हिंदुस्तान की आदिगोल्ड माइंस कंपनी ने 10 महीने पहले ही अपना काम समेट लिया है।
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अस्कोट के बड़ीगांव में जमीन के अंदर कीमती धातुओं का पता लगाने के लिए यूएनडीपी ने 1965 से 1980 तक व्यापक स्तर पर सर्वे किया था। उसके तुरंत बाद जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया तथा यूपी खनन विभाग ने भी सर्वे किया।
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एक टन खनिज का शोधन करने पर 0.48 ग्राम सोना
व्यापक सर्वे के बाद 2006 में इस बात की पुष्टि हो गई कि बड़ीगांव में एक टन खनिज का शोधन करने पर 0.48 ग्राम सोना मिल सकता है। इसके अलावा, 38 ग्राम चांदी, 2.6 ग्राम कॉपर, 5.8 ग्राम जिंक मिल सकता है।
इस पुष्टि के बाद एसआरके कंसलटिंग कोलकाता के डा. जेएफ काच्यूर और सौविक बनर्जी ने धातु का आकलन किया था। कनाडा की पेवलक्रीक माइनिंग कंपनी ने कीमती धातु मिलने की संभावना को देखते हुए 2007 से वहां पर ड्रिलिंग शुरू की।
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कंपनी इस काम में 100 करोड़ रुपये लगाना चाहती थी। कनाडा की कंपनी ने भारतीय कंपनी आदिगोल्ड माइंस को अपना पार्टनर बनाया। आदिगोल्ड कंपनी ने भूवैज्ञानिक डा. संतोष पंत को कुछ समय तक वहां तैनात भी किया। कंपनी को उम्मीद थी वहां कम से कम नौ लाख टन धातु मिल सकता है।
प्रोजेक्ट मैनेजर ने इलाका छोड़ा
आदिगोल्ड माइंस के प्रोजेक्ट मैनेजर वरुण कुमार जनवरी में अस्कोट छोड़ चुके हैं। कंपनी में काम कर रहे 150 लोग अब बेरोजगार हैं। उनका पुराना भुगतान भी नहीं हो पाया है। वरुण कुमार अपने घर बिहार जा चुके हैं। स्थानीय प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे हैं।
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अभ्यारण्य के कारण पैदा हुई बाधा
धातु खनन का यह क्षेत्र अस्कोट अभ्यारण्य की परिधि में आता है। इस स्थान पर काम करने के लिए नेशनल वाइल्ड लाइफ कमेटी की अनुमति जरूरी होती है। कंपनी को अनुमति नहीं मिली और पेवलक्रीक ने फंडिंग बंद कर दी। यहीं से यह साकार होता सपना समाप्त हो गया।
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