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राजमहल से रवाना हुई गाडू घड़ा कलश यात्रा

Tue, 26 Apr 2016 10:28 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नरेंद्रनगर (टिहरी)
ब्यूरो / अमर उजाला, नरेंद्रनगर (टिहरी) Updated Tue, 26 Apr 2016 10:28 AM IST
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gaadu ghara kalash yatra for badrinath dham
गाडू घड़ा कलश यात्रा - फोटो : amar ujala

बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के बाद छह माह तक भगवान बदरी विशाल को चढ़ाया जाने वाला तिलों का तेल सोमवार को महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह की मौजूदगी में शहर की दर्जनों सुहागिन महिलाओं ने निकाला।

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शाम को गाडू घड़ा (तेल कलश) की विधिवत पूजा अर्चना कर तेल कलश को ऋषिकेश के लिए रवाना किया गया। गाडू घड़ा को 11 मई को तड़के साढ़े चार बजे बदरीनाथ के कपाट खुलने के मौके पर गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के सदस्यों ने भोग बनाकर प्रतीकात्मक के रूप में भगवान बदरी विशाल को भोग चढ़ाया।
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नरेंद्रनगर राजदरबार में आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल, संपूर्णानंद जोशी ने सोमवार सुबह 10 बजे राजमहल में स्थित मां राज-राजेश्वरी और लक्ष्मी नारायण के मंदिर में पूजा अर्चना कर महाराजा मनुजयेंद्र शाह और महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह के हाथों तिलों के तेल निकालने की परंपरा को मुहूर्त रूप दिया।
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इसके बाद शहर की दर्जनों सुहागिन महिलाओं और महारानी ने पीले वस्त्र धारण कर तिलों को कड़ाई में भूना। फिर ओखली में कूटकर और सिलबट्टा में पीसकर तेल निकाला गया। शाम को महाराजा ने गाडू घड़ा कलश की पूजा कर कलश को ऋषिकेश के लिए रवाना किया। परंपरा के अनुसार बदरीनाथ के कपाट खुलने के दौरान छह माह तक भगवान बदरी विशाल को इस तेल का लेपन किया जाता है और पूजा में भी इसका प्रयोग किया जाता है।

इस मौके पर श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष सुरेश चंद्र डिमरी, राकेश कुमार डिमरी, हरीश डिमरी, अरविंद डिमरी, ज्योतिष प्रसाद डिमरी, भाष्कर डिमरी, संतन प्रसाद डिमरी, विकास डिमरी, हरीश चंद्र डिमरी, नीरज सेमवाल और राजपाल सिंह जडधारी आदि उपस्थित थे।

गाडू घड़ा 10 मई को पहुंचेगी बदरीनाथ
मंगलवार 26 अप्रैल को गाडू घड़ा कलश यात्रा सुबह 10 बजे ऋषिकेश से प्रस्थान कर शाम छह बजे श्रीनगर पहुंचेगी। 27 अप्रैल को यात्रा श्रीनगर से प्रस्थान कर रुद्रप्रयाग होते हुए 6 बजे शाम कर्णप्रयाग स्थित उमा देवी मंदिर पहुंचेगी। 28 अप्रैल को दोपहर 12 बजे डिमर गांव के लिए चलेगी। सात मई तक श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर डिमरी में विश्राम करेंगी।


8 मई को यात्रा डिमर गांव से चलकर जोशीमठ स्थित नृसिहं मंदिर पहुंचेगी। 9 मई को बदरीनाथ के रावल और शंकराचार्य की गद्दी के साथ पांडुकेश्वर पहुंचेगी। 10 मई को उद्धव और कुबेर की डोली के साथ बदरीनाथ धाम पहुंचेगी। 11 मई  को तड़के 4.30 बजे बदरीनाथ के कपाटोद्घाटन (ब्रह्ममूर्त) के मौके पर गर्भगृह में स्थापित की जाएगी।

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