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केदारनाथः वैदिक रीति रिवाजों से होगा अंतिम संस्कार
हरिद्वार/ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jun 2013 07:22 PM IST
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हिंदू धर्म रीति रिवाज और पंरपराओं से समृद्घ है। धर्म की इन्ही परंपराओं के निर्वहन हेतु शांतिकुज हरिद्वार से एक दल केदारनाथ में आई आपदा में मारे गए लोगों का हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार करने के लिए निकल गया है।
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केदारघाटी में पड़े शवों को ढूंढने और वैदिक रीति रिवाज से उनके अंतिम संस्कार के लिए शांतिकुंज का 16 सदस्यीय दल रविवार को रवाना हुआ है। इस दल में शांतिकुंज एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के आठ-आठ युवा शामिल हैं। ये सभी आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव रखते हैं। प्रशासन की अपील पर यह दल केदारघाटी के लिए रवाना हुआ।
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आपदा राहत कार्य के तहत शांतिकुंज के नौवें दल रविवार को डा. प्रणव पण्ड्या एवं शैल दीदी ने तिलक कराके रवाना किया। दल को डा. चिन्मय पण्ड्या, डा. बृजमोहन गौड ने हरी झंडी दिखाई। यह दल जौलीग्रांट से प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराये गये हेलीकाप्टर से केदारघाटी तक पहुंचेगा।
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वैदिक रीति से होगी अंत्येष्टि
जहां केदारघाटी में 16 जून को हुई प्राकृतिक त्रासदी में असमय काल कलवित हुए श्रद्धालुओं के शव को निकालने का कार्य करेगा एवं उनका सामूहिक अंत्येष्ठि भी वैदिक रीति से करायेगा। इस हेतु पौरोहित्य से प्रशिक्षित स्वयंसेवक भी साथ हैं।
दल में चिकित्सक डा. प्राज्ञ भी शामिल हैं। जो स्वयंसेवकों एवं स्थानीय लोगों की चिकित्सकीय कार्य में सहायता करेंगे। दल अपने साथ रेस्क्यू का सारा सामान लेकर गया है।
शांतिकुंज प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि केदारघाटी में जहां-तहां लोगों के शव पड़े हैं, समय से उनकी अन्त्येष्टि नहीं होने से बीमारी फैलने का भय है। इस आशय को लेकर प्रशासन ने हमारी मदद मांगी है।
इसलिए हमने पौरोहित्य में प्रशिक्षित एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के युवाओं की 16 सदस्यीय टीम भेजने का साहसिक निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 दिनों से पड़े शवों को निकाल कर सामूहिक अंत्येष्टि का कार्य किया जायेगा।