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उत्तराखंड में पहली बार गवर्नर सरकार
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 27 Mar 2016 07:38 PM IST
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गवर्नर केके पॉल
- फोटो : file photo
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राज्य में पहली बार गवर्नर की सरकार होगी। 16वें साल में प्रवेश कर चुके उत्तराखंड में भले ही कितनी सियासी उठापटक रही हो, लेकिन हमेशा प्रजातांत्रिक प्रणाली के तहत चुनी गई सरकार का ही शासन रहा।
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राज्य की जनता ने 15 साल में आठ मुख्यमंत्री देखे, लेकिन एक भी दिन राष्ट्रपति शासन नहीं देखा। हालांकि अविभाजित यूपी में यह सब होता रहा, लेकिन अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में कभी यह नौबत नहीं आई।
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नौ नवंबर 2000 को जब उत्तराखंड राज्य का उदय हुआ, तब अविभाजित यूपी में भाजपा की सरकार थी। लिहाजा यहां भी भाजपा का मुख्यमंत्री बना। नित्यानंद स्वामी प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने तो हरीश रावत आठवें।
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भाजपा के सात साल के शासनकार में बने पांच मुख्यमंत्री
भाजपा के सात साल के शासनकाल में पांच मुख्यमंत्री बने और कांग्रेस के नौ साल के शासनकाल में जनता ने तीन मुख्यमंत्री देखे। 15 साल में राज्य के सियासी हालात कितने भी कठोर रहे हों, लेकिन हमेशा निर्वाचित सरकार ने ही सत्ता संभाली।
राजनीतिक तौर पर इस छोटे राज्य में बड़ी उठापटक होती रही, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ कि राज्य का शासन सीएम सचिवालय से शिफ्ट होकर राजभवन का रुख कर सके।
राज्य गठन के बाद प्रदेश की जनता पहली बार राष्ट्रपति शासन से रूबरू होगी। राज्य के नेताओं को भी राष्ट्रपति शासन की आदत नहीं है। दल जरूर बदलते रहे, लेकिन हमेशा अपने ही बीच के नेताओं ने सत्ता का संचालन किया। राष्ट्रपति शासन में इन नेताओं के तौर तरीकों का क्या अनुभव रहेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।