जो कल तक थे आंख की किरकिरी, आज बने BJP का सहारा
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को भाजपा और कांग्रेस के बागी विधायकों को आड़े हाथों लिया। रावत ने भाजपा को पहले अपने सीएम पद के दावेदारों के झगड़े को सुलझाने की सलाह दी।
रावत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को भाजपा ने भ्रष्टतम मुख्यमंत्री करार दिया था और अब उन्हीं को अपनी गोद में बैठा लिया है। रावत ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त में जुटे रहने का आरोप भी जड़ा। रावत ने यह भी आरोप जड़ा कि भाजपा राजभवन को भी दबाव में लेने की कोशिश में जुटी है।
बीजापुर स्थित अपने आवास पर सोमवार को मीडिया से मुखातिब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि भाजपा में तो एक मुख्यमंत्री पद के नौ दावेदार हैं। भाजपा ने पूर्व मंत्री अमृता रावत को लेकर भी उद्यान घोटाले का आरोप जड़ा था। वहीं अमृता रावत को भी भाजपा ने अपने पाले में खींच लिया है। हरक सिंह भी भाजपा के लिए किरकिरी थे। अब वहीं उनके प्रिय हैं।
रावत ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त में जुटे रहने का आरोप जड़ा। रावत ने कहा कि भाजपा इन दिनों गांव-गांव गली-गली रुपयों के बोरे लेकर घूम रही है। भाजपा के नेता खुद कह रहे हैं कि कांग्रेस के दो-चार विधायक उनके संपर्क में हैं। भाजपा के कई रष्ट्रीय उपाध्यक्ष और महामंत्री जैसे शार्प शूटर इसी काम को अंजाम देने के लिए उत्तराखंड की गलियों की खाक छान रहे हैं।
रावत ने भाजपा पर राजभवन को भी दबाव में लेने का आरोप जड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर केंद्र की भाजपा सरकार की ओर दबाव बनाया जा रहा है। राज्यपाल को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। इससे लगातार इसकी पुष्टि हो रही है।
कोई सा भी हो दल, नहीं बढ़ा संख्याबल
विधायकों की सेंधमारी को लेकर फिलहाल दोनों मुख्य राजनीतिक दलों के दावों में दम नजर नहीं आ रहा है। जो स्थिति 18 मार्च को सरकार के खिलाफ वोटिंग करने के वक्त बनी थी, वह अभी भी बरकरार है। घटनाक्रम तो बहुत हुआ, लेकिन अंकगणित आज भी 18 मार्च वाला ही है। सरकार को जाना पड़ा, लेकिन किसी भी दल के संख्याबल में इजाफा नहीं हुआ।
विगत 18 मार्च को राज्य की राजनीति में जो घमासान शुरू हुआ था, उठापटक तो बहुत हुई और सरकार भी चली गई, लेकिन अंकगणित के लिहाज यथास्थिति बनी हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा था कि भाजपा के कई विधायक उनके संपर्क में हैं, लेकिन कांग्रेस अभी तक भाजपा के निलम्बित विधायक भीमलाल से आगे नहीं बढ़ सकी। कई बार कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी दावा किया कि भाजपा के विधायक कांग्रेस के साथ हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं दिखा।
उधर, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजय वर्गीय और प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भी कई बार दावा किया कि आधा दर्जन कांग्रेस विधायक उनके संपर्क में हैं। स्थिति यहां भी कुछ ऐसी ही रही। कुल मिलाकर दोनों दलों में यथास्थिति बरकरार है। नेताओं के ये दावे भविष्य में झूठ साबित होंगे या सच, यह तो बाद में पता चलेगा, फिलहाल तो किसी के आगे बढ़ने की स्थिति पैदा होती नहीं दिख रही है।