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जर्मन तकनीकि ‘वेस्ट टू इनर्जी के जरिए होगा बिजली उत्पादन
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 05 Apr 2016 10:35 PM IST
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फ्रांस, जर्मनी और इटजी जैसे विकसित देशों की तर्ज पर अब भारत में जर्मन तकनीक ‘वेस्ट टू इनर्जी’ के जरिए के बिजली उत्पादन की पूरी तैयारी है। शहरी विकास और बिजली विभाग की ओर से निजी कंपनियों की मदद से रुड़की में कूड़ा करकट से बिजली संयंत्र लगाने को लेकर हुई बैठक में तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई।
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विद्युत नियामक आयोग शासन और एनजीटी के आला अफसरों की मौजूदगी में संयंत्र लगाने वाली कंपनी ने प्रस्ताव रखा कि वह संयंत्र से 25 मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगी। जो 12 रुपये प्रति यूनिट की दर से यूपीसीएल को बेचेगी। यह मुद्दा उठने पर कि इतनी मंहगी बिजली खरीदकर यूपीसीएल कितनी कीमतों में उपभोक्ताओं तक आपूर्ति करेगा।
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सिडकुल के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार और निजी कंपनी बीएसआर ग्रीन पावर के विशेषज्ञों ने तर्क रखा कि देश में यह पहला संयंत्र होगा जहां कूड़ा करकट से क्लीन इनर्जी का उत्पादन होगा। यानी संयंत्र से कचरे के रूप में कुछ भी बाहर नहीं निकलेगा।
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विशेषज्ञों के मुताबिक शहरों में निकलने वाले कचरे के अलावा अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट, औद्योेगिक इकाइयों, पशु बधशालाओं, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले कचरे़ बिजली उत्पादन में प्रयोग किया जाएगा।
18 नगर निकायों के पांच सौ टन कचरे का होगा इस्तेमाल
कंपनी के विशेषज्ञों के मुताबिक रुड़की में स्थापित होने वाले वेस्ट टू इनर्जी प्लांट में रुड़की, हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश समेत 18 नगर निकायों से निकलने वाले 500 टन कचरे का प्रयोग बिजली उत्पादन में किया जाएगा। इससे न सिर्फ नगर निकायों को कचरा प्रबंधन से छुटकारा मिलेगा वरन कूड़ा करकट देने के एवज में राज्य सरकार से कुछ वित्तीय सहायता मिलने की भी उम्मीद है।
मार्च 2017 से शुरू होगा बिजली उत्पादन
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नोडल आफिसर और अपशिष्ट प्रबंधन विशेषज्ञ ओमेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक यदि राज्य सरकार से समय रहते अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी हो जाता है और सरकार व कंपनी के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हो जाते हैं तो मार्च 2017 तक संयंत्र को स्थापित कर दिया जाएगा।