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नकली नोट छापने वाले कारखाने का भंडाफोड़

Wed, 14 Aug 2013 02:07 AM IST
हल्द्वानी/ब्यूरो
हल्द्वानी/ब्यूरो Updated Wed, 14 Aug 2013 02:07 AM IST
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duplicate notes factory busted

उत्तराखंड में उधमसिंह नगर के जसपुर में पुलिस ने सौ रुपये के नकली नोट बनाने वाले कारखाने का भंडाफोड़ कर गिरोह के सरगना समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

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उनसे 70,000 रुपये के नकली नोट, कंप्यूटर, मोहरें, परिवहन तथा आयकर विभाग के नकली कागजात और 10-10 रुपये के एक हजार से अधिक स्टांप पेपर बरामद हुए हैं। गिरोह के चार लोग फरार हैं।
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ये लोग 10 रुपये वाले स्टांप पेपर पर 100 रुपये के नोट को स्कैन कर नकली नोट छापते थे। गिरोह अब तक उत्तराखंड के विभिन्न शहरों और सीमावर्ती यूपी के इलाकों में लाखों के नकली नोट चला चुका है। मुख्य आरोपी शहजाद जसपुर के वार्ड नंबर 11 के सभासद मोहम्मद हसीन का बेटा है।
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पुलिस ने मंगलवार को यहां बताया कि 10 जून 2012 को नकली मोहरें और कागजात तैयार करने के मामले में मोहल्ला नई बस्ती निवासी शहनवाज पुत्र मोहम्मद हुसैन को गिरफ्तार किया था। उससे 42 मोहरें, नकली कागजात बरामद हुए थे।

पूछताछ में उसने बताया था कि लकड़ी मंडी चौराहा निवासी शहजाद भी नकली नोट छापने के काम में संलिप्त है। शहजाद और शहनवाज दोनों भाई हैं।

मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने पुराने सिनेमा हाल के पास शहजाद के कंप्यूटर सिखाने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट में छापा मारा।

वहां से पुलिस ने 70 हजार रुपये के सौ-सौ के जाली नोट, हजारों रुपयों के स्टांप पेपर, कंप्यूटर, हार्डडिस्क, मॉनीटर, प्रोसेसिंग यूनिट, कटर, नकली मोहरें, आयकर और परिवहन विभाग के नकली कागज (जिनमें फर्जी रसीदें आदि शामिल हैं), उत्तराखंड और यूपी बोर्ड की फर्जी मार्कशीट बरामद की।

इस दौरान पुलिस ने लकड़ी मंडी नई बस्ती निवासी शहजाद, शहनवाज, मोहसीन और ग्राम जलालपुर थाना डिलारी यूपी निवासी राजपाल को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो कथित पत्रकार मनमोहन निवासी मोहल्ला जुलाहान और हिमांशु निवासी भूतपुरी (यूपी) और नई बस्ती निवासी दो लोग (दोनों का नाम वसीम है) फरार हैं।

बैंक प्रबंधकों ने बताया कि नोट स्कैन करने में आरबीआई के मानकों वाली उच्च क्वालिटी की स्याही इस्तेमाल की गई है जिससे नोट असली लग रहे हैं।

आरोपियों में एक रिटायर्ड प्रिंसिपल
आरोपियों में एक ग्राम जलालपुर थाना डिलारी (यूपी) निवासी राजपाल सिंह ठाकुरद्वारा तहसील के किसी मैनेजमेंट के स्कूल का रिटायर्ड प्रिंसिपल है। अब ठाकु रद्वारा में उसका ‘सुभाष स्मारक इंटर कालेज’ के नाम से स्कूल है। वह सात सौ रुपये देकर उत्तराखंड एवं यूपी बोर्ड की नकली मार्कशीट और सनद बनवाता था।


राजपाल सिंह फर्जीवाड़े में पहले भी जेल की हवा खा चुका है। दो साल पहले बोर्ड परीक्षा में बाहरी छात्रों को एडमिशन दिलाने के लिए अमरोहा के कालेज के नाम से फर्जी टीसी बनाई थी। एक विद्यालय की मान्यता लेकर वह दो स्कूल संचालित कर रहा है। उसके खिलाफ जांच चल रही हैं। उसके बेटे विपिन कुमार की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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