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यहां बिन आपदा के ही लुट गए लोग
भुवन शाह
Updated Mon, 01 Jul 2013 11:14 AM IST
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मुख्य बाजार स्थित एक होटल वर्कर आलोक सोया है, तभी बदरीनाथ हाईवे पर जोशीमठ की ओर वाहन दौड़ने की आवाज सुनते ही वह चौकन्ना हो जाता है। होटल से बाहर आकर झांकता है, तो फिर वही वीरानगी, सन्नाटा।
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यात्रा ठप होने से हो रहा नुकसान
यह सिर्फ आलोक के साथ ही नहीं, बल्कि बदरीनाथ यात्रा रूट पर कमोवेश सभी होटल, लॉज स्वामियों के साथ हो रहा है।
चारधाम यात्रा ठप होते देख व्यवसायियों ने अपने होटल, लॉज में बिजली, पानी के कनेक्शन कटवा दिए हैं। वर्करों को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है।
प्रकृति का कुचक्र
गौचर, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग, चमोली, मायपुर, गडोरा, पीपलकोटी, पाखी, हेलंग और जोशीमठ में होटल, लॉज और छोटी-बड़ी दुकानें ठप पड़ी हैं। बदरीनाथ यात्रा रूट पर शीतकाल (नवंबर से अप्रैल) में सन्नाटा छाया रहता है।
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मई से अक्तूबर तक यात्रा की चहल-पहल में छह माह कब गुजर जाते, व्यापारियों को पता ही नहीं चलता है। लेकिन इस बार प्रकृति के कुचक्र ने ग्रामीणों को बेरोजगार बना दिया है।
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होटल मालिक देवेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि पीपलकोटी में आपदा से कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन यहां का व्यवसाय चारधाम यात्रा पर निर्भर रहता है। इस बार यात्रा एक माह भी नहीं चली।
बेरोजगार हो गए ग्रामीण
बैंक, बिजली, पानी, राशन का कर्जा इतना हो गया है कि चार साल के सीजन में भी नहीं कमाया जा सकता। सरकार को यात्रा रूटों पर आपदा को देखते हुए बिजली, पानी निशुल्क देनी चाहिए।
यात्रा ठप होने से कई ग्रामीण बेरोजगार हो गए हैं। यहां एक आइसक्रीम विक्रेता द्वारा महंगी आइसक्रीम खराब होने की डर से लोगों को निशुल्क दी जा रही है। कई होटल, लॉज बंद हो गए हैं।