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आपदा से राहत देने के लिए पहाडों पर उतरी ‘देवियां’
लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी
Updated Sat, 06 Jul 2013 07:59 AM IST
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पिंडर घाटी में आपदा के बाद से लोग घरों में कैद होकर रह गए। सड़क, पुल, पैदल मार्ग, झूला पुल यहां तक जंगलों को जाने वाली पगडंडियां भी जलप्रलय में तहस-नहस हो गए।
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अधिकारी केदारघाटी और गोविंदघाट में हुए विनाश को संभालने में लगे, तो पिंडर घाटी की सुध लेना ही भूल गए।
सड़क तक ही सिमटी थी राहत
15 दिन बाद यहां चंद स्वयंसेवी संस्थाओं और यूथ कांग्रेस ने कुमाऊं से थराली तक राहत पहुंचाई, लेकिन वह सिर्फ सड़क तक ही सिमटी रही। टूटे संपर्क मार्ग और पुलों को देख राहत पहुंचाने वाली संस्थाओं के भी हाथ पांव फूल गए।
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ऐसे में राहत पहुंचाने का बीड़ा उठाया थराली तहसील की 65 से अधिक महिलाओं ने। इन्होंने 38 प्रभावित गांवों में से 13 दुर्गम गांवों को चुना और घास काटने की कंडी से सामान पहुंचाया।
इन गांवों में पहुंचाया राशन
सड़क मार्ग से कटे सुनाऊं मल्ला और तल्ला, देवलग्वाड़, सेरा-विजयुपर, असौं, तोप, बैनोली एससी बस्ती, डुंगाखोली, जूनीगाड़, थनगीरा सहित 13 गांवों में चलाई मुहिम। सभी गांव थराली से 7 से 14 किमी की पैदल दूरी पर हैं।
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हमारी संस्कृति सहभागिता की रही है। महिलाओं ने विपदा के समय अपनी घर गृहस्थी छोड़कर जो सहयोग की भावना दिखाई है। वह सराहनीय है।
- सुशील रावत, पूर्व प्रमुख थराली
मैंने भी विगत चार दिन तक पिंडर घाटी में राहत सामग्री बांटी। जब महिलाओं ने खुद ही दुर्गम गांवों में कंडी से राहत पहुंचाने की बात कही, तो मैं भी उनके साथ हो गया।
- आनंद सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष युवक कांग्रेस
15 दिन बाद राहत सामग्री तो पहुंची, लेकिन गांवों तक पहुंचाने की समस्या खड़ी हो गई। फिर हमने अपने गांव बैनोली की प्रभावित एससी बस्ती में राशन पहुंचायी, लेकिन अन्य गांवों के संकट को देख रहा न गया और अन्य गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने का मन बनाया और कंडियों से तीन दिन तक अलग-अलग गांवों में राहत सामग्री पहुंचाई।
- बीना राणा, दीपा देवी, सरस्वती देवी, मंजू देवी निवासी बैनोली
आपदा के दो सप्ताह बाद जब यहां राहत पहुंची, तो लेकिन दूरस्थ गांवों में नहीं पहुंच पा रही थी। बंदरबांट की आशंका को लेकर गांवों में कंडियों से राहत पहुंचाने का काम किया गया। 27 किलो से अधिक वजनी राहत के पैकेट को कंडियों के सहारे पहुंचाया। कतिपय प्रभावित गांवों की महिलाएं और पुरुष राहत लेने के लिए आधे रास्ते तक भी पहुंचे।
- मुन्नी देवी, आमा देवी, जानकी देवी, दमयंती देवी आदि