{"_id":"168e18c2-e1f6-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"destruction-in-gangotri-ghati","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगोत्री घाटीः आपदा के बाद वीरान हुई घाटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगोत्री घाटीः आपदा के बाद वीरान हुई घाटी
देहरादून/ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jul 2013 11:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीर्थयात्रियों और सैलानियों से गुलजार रहने वाली गंगोत्री घाटी अब वीरान हो गई है। जो होटल-धर्मशालाएं यात्रियों से खचाखच भरे रहती थे, उन पर ताले लटके हैं। घाटी में सन्नाटा पसरा हुआ है।
विज्ञापन
चारधाम यात्रा पर निर्भर थी रोजी
गंगा घाटी के ज्यादातर गांवों के लोगों की रोजी चारधाम यात्रा पर निर्भर थी। यहां हजारों लोग यात्रा के दौरान स्वरोजगार करते थे।
उत्तराखंड की पल-पल की अपडेट
विज्ञापन
पिछले कुछ वर्षों में यहां कई बड़े होटल और दुकानें खुली, जिससे सिर्फ छह माह के यात्रा काल में वे अच्छी-खासी आय अर्जित कर लेते थे, लेकिन 16-17 जून की बाढ़ ने इन लोगों की रोजी-रोटी पर पानी फेर दिया है।
विज्ञापन
सता रही चिंता
बाढ़ से उत्तरकाशी से गंगोत्री तक सड़क जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। इसे खोलने में अभी लंबा समय लगने के आसार हैं। ऐसे में यात्रा पर निर्भर हजारों लोगों को अपने परिवार के पालन-पोषण की चिंता सता रही है। लोग अपने होटल, दुकान तथा ढाबों से सामान समेट कर घर लौट गए हैं।
इसी वर्ष बैंक से 20 लाख का ऋण लेकर नेताला में होटल बनाया। एक होटल किराया पर चलाता था। मैं तो बेरोजगार हुआ ही साथ में होटल में काम करने वाले 20 युवाओं के समक्ष भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो रखा है।
- आमोद पंवार, होटल व्यवसायी
दस वर्षों से यात्राकाल के दौरान गंगोत्री में होटल चलाता हूं। सीजन में इतना कमा लेता था कि साल भर की आजीविका आसानी से चल जाती थी। इस बार तो होटल चलाने के लिए खरीदे गए राशन की कीमत भी नहीं उठ पाई। अब तो राशन वालों के उधार चुकाने की चिंता भी है।
-फत्ते सिंह, होटल व्यवसायी