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स्मार्ट सिटी की चुनौतियों से निपटना आसान नहीं
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 10 Apr 2016 12:41 PM IST
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स्मार्ट सिटी
- फोटो : डेमो फोटो
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स्मार्ट सिटी के टॉप 40 प्रस्ताव में शामिल होने के लिए दून की प्रोजेक्ट रिपोर्ट फाइल हो रही है, लेकिन अन्य शहरों को टक्कर देना उत्तराखंड के लिए आसान नहीं होगा।
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रेट्रोफिटिंग और रि डेवलपमेंट के मामले में एमडीडीए का अब तक का अनुभव बेहद खराब रहा है। जिन क्षेत्रों को रेट्रोफिटिंग प्रस्ताव में शामिल किया गया है उनमें से अधिकतर वही पुराने प्रस्ताव हैं जो फाइलों में बंद होकर रह गए। चकराता रोड, आढ़त बाजार से लेकर इंदिरा मार्केट जैसी योजनाएं वर्षों से पाइपलाइन में अटकी हैं। ऐसे में अब स्मार्ट सिटी में इन्हें शामिल करने से फिर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए पहले चरण में उत्तराखंड से देहरादून का चयन किया गया। तब तत्कालीन राज्य सरकार ने चाय बागान में नया शहर बसाने के लिए ग्रीन फील्ड का प्रस्ताव तैयार किया। लेकिन केंद्र सरकार की जारी पहली सूची में दून को स्थान नहीं मिला। इसके बाद देहरादून को दोबारा संशोधित प्रस्ताव जमा करने का समय दिया गया।
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इस बार लोगों की राय जानने के लिए माई जीओवी वेबसाइट पर लोगों से सुझाव मांगे गए। करीब 70 फीसदी लोगों ने ग्रीन फील्ड में स्मार्ट सिटी के साथ ही जोन चार में रेट्रोफिटिंग के विकल्प पर स्वीकृति जताई। हालांकि अंतिम समय में इसे संशोधित कर जोन चार में रेट्रोफिटिंग के विकल्प को हरी झंडी दी गई। खट्टे अनुभवों के बावजूद रेट्रोफिटिंग पर विकल्प मुश्किलें बढ़ा सकता है।
यह क्षेत्र हुआ चयनित
3788 एकड़, टी स्टेट का 350 एकड़, चकराता रोड, सहारनपुर रोड और शिमला बाईपास रोड के बीच का क्षेत्र जिसमें घंटाघर, पलटन बाजार, खुड़बुड़ा, झंडा साहिब, लक्ष्मण रोड, इंदिरापुरम, जीएमएस रोड, मोहित नगर, बसंत विहार, राजेंद्रनगर, विजय पार्क, साईं लोक , माजरा आदि।
चकराता रोड में लगे कई साल
चकराता रोड रि डेवलपमेंट प्लान को लागू करने में कई साल का समय लग गया। यहां घंटाघर पर महज एक दुकान को हटाने को लेकर सरकार की नाक में दम हो गया। इसके बाद अन्य दुकानदारों ने भी प्लान का विरोध किया। कई वर्षों की मशक्कत के बाद योजना पर काम हो सका।
आढ़त बाजार जस का तस
आढ़त बाजार शिफ्टिंग को लेकर कई बार प्रस्ताव तैयार हो चुका है। हालांकि आज तक इस प्रस्ताव पर कुछ नहीं हो सका। आढ़त बाजार को शिफ्ट करने का व्यापारी लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। कई बार वार्ता के बावजूद इस मामले में सहमति नहीं बन पाई है।
इंदिरा मार्केट का प्लान भी अधर में
इंदिरा मार्केट रि डेवलपमेंट प्लान को लेकर भी व्यापारी लगातार विरोध जता रहे हैं। व्यापारियों ने अभी तक दिए गए हर प्लान को नकार दिया है। हालांकि व्यापारियों को शिफ्ट करने और रि डेवलपमेंट को लेकर लगातार नए प्लान तैयार किए जा रहे हैं।
मुश्किल से खुली डिस्पेंसरी रोड
डिस्पेंसरी रोड रि डेवलपमेंट भी कई साल का समय लगा। एक छोटी सी सड़क पर काम करने के लिए वर्षों तक प्रयास करने पड़े। व्यापारियों के भारी विरोध के चलते रिडेवलपमेंट का एक भी प्लान सफल नहीं हो सका। लंबी मशक्कत के बाद सड़क पर काम हो सका।
रेट्रोफिटिंग में किसी तरह की समस्या नहीं होगी। इसके लिए पहले लोगों से वार्ता की जाएगी। स्मार्ट और सुविधा युक्त शहर का कोई भी नागरिक विरोध क्यों करेगा।
- आर मीनाक्षी सुंदरम, नोडल अफसर स्मार्ट सिटी