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जोखिम भरी है बदरीनाथ की डगर

Sat, 31 Aug 2013 04:01 PM IST
अमर उजाला, गोपेश्वर
अमर उजाला, गोपेश्वर Updated Sat, 31 Aug 2013 04:01 PM IST
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dangerous badrinath route

भले ही चारधाम यात्रा शुरु करने की तैयारियां जोंरों से चल रही हों, लेकिन बदरीनाथ धाम तक पहुंचना अभी भी जोखिम भरा है।

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आपदा के बाद से चार धामों में सर्वश्रेष्ठ बदरीनाथ धाम में सन्नाटा पसरा हुआ है। धाम में रह रहे लगभग 250 स्थानीय लोग और आईटीबीपी के जवान ही सांय-सुबह बदरीनाथ धाम में पहुंच कर सन्नाटा तोड़ रहे हैं। आपदा के बाद से अभी तक बदरीनाथ धाम में 64 तीर्थयात्री और 32 स्थानीय श्रद्धालु मत्था टेकने पहुंचे।

जोखिम भरे रास्ते
इनमें से जुलाई माह में 23 कांवड़ियों का दल बदरीनाथ में जलाभिषेक को पहुंचा। इसके पश्चात 22 अगस्त को तमिलनाडू के 40 और 32 स्थानीय लोग बदरीनाथ धाम में मत्था टेकने पहुंचे।
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कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कोलकाता के एक तीर्थयात्री ने लामबगड़ से हनुमान चट्टी तक के जोखिम भरे रास्ते को पार कर बदरीनाथ धाम में मत्था टेका।

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बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग लामबगड़ से हनुमान चट्टी तक आठ किमी बह गया है। यहां बीआरओ द्वारा सड़क बनाई जा रही है। बीआरओ के अधिकारियों ने 30 सितंबर तक बदरीनाथ धाम तक वाहनों की आवाजाही शुरु करने का दावा किया है। लेकिन लामबगड़ क्षेत्र में लगातार हो रहा भूस्खलन नियत तिथि तक हाईवे खोलने के संकेत नहीं दे रहा है।

नियमित हो रही बदरीविशाल की पूजा
बदरीनाथ धाम में प्रतिदिन धर्माचार्यों द्वारा नियमित पूजा संपन्न की रही है। बदरीनाथ के रावल केशवन नंबूदरी द्वारा प्रतिदिन बदरीनाथ का श्रृंगार, अभिषेक और राज भोग लगाया जा रहा है।


वहीं, पंडा पुरोहित, डिमरी पंचायत के सदस्य और अन्य पुरोहित धाम में प्रतिदिन विष्णु सहस्रनाम, रुद्री पाठ व अन्य धार्मिक क्रिया कलाप संपन्न कर रहे हैं। बदरीनाथ धाम में बाजार सूना पड़ा हुआ है। जिसके चलते बामणी और माणा गांवों के ग्रामीण स्व उत्पादित आलू, गोभी, मटर की सब्जी को मंदिर समिति और धर्माचार्यों को बेचकर अपनी आर्थिकी जुटा रहे हैं।

जबकि खाद्यान्न के लिए लोगों को बदरीनाथ से 20 किमी की दूरी पर पांडुकेश्वर बाजार आना पड़ रहा है। मंदिर समिति के कर्मचारियों व पुरोहितों के लिए जोशीमठ से हेलीकॉप्टर में खाद्यान्न भेजा जा रहा है।

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