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घोड़े की ढाई चाल से ‘सरकार’ चेकमेट

Sat, 19 Mar 2016 05:34 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 19 Mar 2016 05:34 PM IST
सार

सियासी सूझबूझ से पलट गया पासा।
भाजपा को घेरने में नहीं छोड़ रही थी कांग्रेस कोई कसर।
फजीहत से बचने के लिए भाजपा लगी थी मैनेजमेंट में।

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crisis deepens Uttarakhand government.
पुलिस का घोड़ा शक्तिमान - फोटो : file photo

विस्तार

कांग्रेस सरकार पुलिस के जिस घोड़े (शक्तिमान) पर पांच दिन से दून से लेकर वाशिंगटन तक भाजपा को घेरे हुए थी उसी घोड़े की सियासत से उलटफेर हो गया। घोड़े से एक भाजपा विधायक पर निशाना साध पूरी पार्टी को घेरने में लगी कांग्रेस को यह तक पता नहीं चला कि किस सियासी सूझबूझ से पासा पलट गया। 

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सीएम हरीश रावत ने घटनाक्रम के बाद घोड़े की सियासत के पीछे भाजपा के बुने सियासी ताने-बाने को माना। रावत ने माना कि वह यह सोचते रहे कि घोड़े के जख्मी होने के मामले में हुई भाजपा की किरकिरी को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा की सीनियर लीडरशिप लगी है, लेकिन चाल यह थी।
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भाजपा को चार दिन से इस फ्रंट पर घेर रही थी कांग्रेस:
भाजपा की रैली में पुलिस के घोडे़ को घायल करने में विधायक गणेश जोशी सहित कई भाजपा नेताओं पर मुकदमा दर्ज कर कांग्रेस उसे भुनाने में लगी रही। घोड़े और विधायक का वीडियो इस कदर वायरल हुआ कि भाजपा को डिजास्टर मैनेजमेंट करने का रास्ता तक नहीं मिला। 
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सदन में शायद ही कोई ऐसा लम्हा गुजरा जब ट्रेजरी बैंच ने विपक्ष पर घोड़े को घायल करने का तंज न कसा हो। सीएम हरीश रावत ने खुद सदन में कहा कि घोड़े को लेकर उनके पास वाशिंगटन (अमेरिका) तक से फोन आए। वह यह जताने में कामयाब रहे कि भाजपा का यह अपराध क्षमा योग्य नहीं है। 

वहीं, भाजपा इस फजीहत से बचने के लिए हर तरह के मैनेजमेंट में लगी रही। सदन में कई बार बैकफुट पर आना पड़ा।

इस मुद्दे पर सियासी रंग तब और चढ़ा जब पुलिस ने दबिश देकर भाजपा के एक कार्यकर्ता को हल्द्वानी से गिरफ्तार किया और दून में कई जगह कार्यकर्ताओं को पकड़ने पहुंची। 

खेल की भनक तो थी लेकिन चूक कर गए हरीश रावत

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बजट - फोटो : amar ujala

शुक्रवार को ही भाजपा की सीनियर लीडरशिप दिल्ली से दून पहुंची तो सरकार ने मान लिया कि वह आपदा प्रबंधन को आई है, लेकिन घोड़े की सियासत के पीछे के खेल को समझने का प्रयास किसी कांग्रेसी नेता ने नहीं किया। यहां तक हरीश रावत को भनक तो थी, लेकिन वह चूक कर गए। 

विधायक गणेश जोशी को गिरफ्तार करने के पीछे की मंशा उसकी भनक का नतीजा तो थी, लेकिन वह पूरी सियासी शतरंज की बिसात में सारी चालों को बूझ नहीं पाए। 

असल खेल तो  कुछ और ही था:
शाम को सदन में जब कांग्रेस के विधायकों ने सदन में पाला बदला तब सीएम और कांग्रेस नेताओं की समझ में आया कि जिसे वह कांग्रेस का घोड़ा माने बैठे तो उसकी चाल टेढ़ी होती है। 

शतरंज के इस गणित को सियासत में भाजपा ने जिस तरह इस्तेमाल किया उसकी बात सीएम को माननी पड़ी। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल और संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा के साथ मंत्रणा कर निकले सीएम हरीश रावत ने कहा कि वह आरएसएस और भाजपा के जुटे वरिष्ठ लीडरशिप को घोड़े से उनकी हुई किरकिरी के आपदा प्रंबधन से जोड़ते रहे लेकिन असल खेल कुछ और ही था।

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