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उत्तराखंड के सियासी घमासान में क्राइम ग्राफ जीरो
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 30 Mar 2016 01:55 PM IST
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पुलिस
- फोटो : प्रतीकात्मक चित्र
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उत्तराखंड में जारी सियासी घमासान को लेकर भले ही कोई खुश नहीं है, पर इन सब के बीच एक सुखद खबर यह है कि शहर का क्राइम ग्राफ जीरो पहुंच गया है।
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इसे देखकर को तो यही लगता है कि अपराध जगत से जुड़े लोग भी सियासी चाल में उलझकर रह गए हैं। चोरी, टप्पेबाजी, वाहन चोरी समेत अन्य अपराधों में बेतहाशा कमी आई है। उधर पुलिस का भी अधिकांश समय वीआईपी मूवमेंट में बीत रहा है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में कुछ भी टिप्पणी करने से परहेज किया। पर उन्होंने इतना जरूर माना है कि सियासी जंग में सब कुछ पीछे छूट गया है।
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फरवरी का महीना दून जिला अपराध के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहा है। अपहरण के साथ हत्या, लूट और चोरी की घटनाओं ने पुलिस की नींद हराम करके रख दी थी। पर मार्च में विधानसभा सत्र शुरू होने के साथ ही बढ़ी सियासी गर्मी में शहर का क्राइम ग्राफ करीब-करीब जीरो आ गया है।
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यह स्थिति तब है जबकि पुलिस पूरे माह राजनीतिक उथल-पुथल में उलझी रही। नौ मार्च से विधानसभा सत्र शुरू होने के बाद से पुलिस के पास क्राइम फ्रंट पर काम करने का समय कम होता चला गया। 14 मार्च को भाजपा के विधानसभा घेराव के दौरान शक्तिमान (घोड़े) की टांग टूटने से लेकर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने के दौरान प्रदेश में शुरू हुई सियासी उथल-पुथल के बीच तो पुलिस के पास सांस लेने तक की फुरसत नहीं मिली।
ऐसा समय अपराधियों के लिए काफी मुफीद था, पर ऐसा लगा कि अपराधी भी प्रदेश की सियासी चाल में उलझे हुए हैं। गौर करने वाली बात यह रही कि इस बार होली पर शहर के किसी भी थाने में छुटपुट मारपीट की घटनाओं को छोड़कर बड़े अपराध का केस दर्ज नहीं हुआ। खुद पुलिस भी इससे अचरज में है।