बागी विधायकों की वापसी का कोई मतलब नहीं : अंबिका
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कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी ने दो टूक कहा कि कांग्रेस के बागी विधायकों की वापसी का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन को भी सिरे से नकार दिया और कहा कि उत्तराखंड को राष्ट्रपति शासन में धकेलने के लिए भाजपा ने झूठे स्टिंग का सहारा लिया है। पार्टी पूरी तरह से हरीश रावत के साथ है।
बुधवार देर शाम कांग्रेस भवन में मीडिया से मुखातिब अंबिका सोनी ने कहा कि उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त कर चुके हैं। ऐसे में अब कांग्रेस का इन विधायकों से कोई लेना-देना नहीं है। पार्टी प्रभारी ने कहा कि कांग्रेस के बागी विधायकों से किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जाएगा। कोई उन्हें कुछ भी कहे पर मैं उन्हें बागी ही कहूंगी। रहा, कांग्रेस से उनके निष्कासन का सवाल तो यह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र का मामला है।
स्टिंग ऑपरेशन के मामले में अंबिका ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का बचाव किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए भाजपा ने झूठे स्टिंग का सहारा लिया है। देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए स्टिंग जैसा हल्का आधार लिया गया। उन्होंने कहा कि हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और हम राष्ट्रपति शासन को कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की हाईकमान के स्तर पर उपेक्षा के सवाल पर कहा कि पार्टी पूरी तरह से उनके साथ है। प्रदेश में कांग्रेस सदन में बहुमत साबित करने के लिए तैयार है।
प्रभारी ने सभी विधायकों का दिल टटोला
बहुमत परीक्षण की तैयारी के लिए दून पहुंची कांग्रेस प्रदेश पार्टी प्रभारी अंबिका सोनी ने बुधवार को कांग्रेस विधायकों का दिल टटोला। प्रभारी ने अलग-अलग भी विधायकों से बातचीत की और उन्हें एकजुट रहने की सीख भी दी। दिन भर एक होटल में पहले बहुमत साबित करने के लिए रणनीति पर बात होती रही। हाईकोर्ट की ओर से छह अप्रैल को फैसला होने की जानकारी मिलने के बाद प्रभारी ने विधायकों को एकजुट रहने की सीख दी। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी शामिल रहे और विधायकों ने उनका पूरा साथ देने का भरोसा भी जताया।
बुधवार को दून पहुंची प्रदेश प्रभारी ने पहले बीजापुर की ओर रुख किया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से बातचीत के बाद प्रदेश प्रभारी ने आईएसबीटी के नजदीक एक होटल की ओर रुख किया। इस होटल में मौजूद कांग्रेस विधायकों के साथ प्रदेश प्रभारी ने बृहस्पतिवार को प्रस्तावित बहुमत परीक्षण को लेकर बातचीत की। साथ ही कांग्रेस का पूरा ध्यान हाईकोर्ट पर भी रहा।
अंबिका सोनी ने विधायकों को एकजुट रहने की सलाह भी दी। देर शाम हाईकोर्ट में तस्वीर साफ होने के बाद प्रभारी ने विधायकों को एकजुटता बनाए रखने को कहा। पार्टी प्रभारी का साफ कहना था कि राष्ट्रपति शासन के मामले में कांग्रेस का पक्ष मजबूत है और देर सवेर भाजपा को इस मामले में बैकफुट पर आना पड़ेगा।
पार्टी प्रभारी ने साफ किया कि पार्टी हरीश रावत के साथ खड़ी है। उन्होंने स्टिंग को भी धोखा करार दिया और कहा कि यह झूठ भी जल्द ही खुलकर सामने आ जाएगा। विधायकों के साथ बंद कमरे में बातचीत के चलते कांग्रेस में भी चर्चाओं का बाजार गरम रहा।
कहा यह भी जाता रहा कि प्रभारी विधायकों से कांग्रेस के बागी विधायकों की वापसी को लेकर भी बातचीत कर रही हैं। बाद में विधायकों ने इस चर्चा को पूरी तरह से नकार दिया। करीब चार घंटे की इस मैराथन बैठक के बाद पार्टी प्रदेश प्रभारी ने कांग्रेस भवन की ओर भी रुख किया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी यहां पहुंचे।
31 मार्च को होने वाले बहुमत परीक्षण पर टिकी निगाहें
कोर्ट के आदेश के मुताबिक 31 को बहुमत परीक्षण होना है। हालांकि, डबल बैंच में केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट के मंगलवार के फैसले को चुनौती दी जा रही है। इतना होने पर भी कांग्रेस की निगाह अब 31 मार्च को होने वाले बहुमत परीक्षण पर आकर टिक गई है।
मंगलवार को देर शाम इंदिरा हृदयेश के आवास पर चाय पार्टी के बहाने इस पर कांग्रेस विधायकों के बीच बातचीत भी हुई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी इस बैठक में शामिल हुए। दिन में गतिविधियों का केंद्र बीजापुर हाउस था। शाम को इस केंद्र के इंदिरा हृदयेश के आवास में शिफ्ट होने को कांग्रेस के अंदरूनी सियासी समीकरणों के बदलाव का संकेत भी माना गया।
ऐसे में चेंज ऑफ गार्ड की कांग्रेस में तेजी से चर्चा मिली। यह भी कहा गया कि स्टिंग ऑपरेशन में उलझे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की छवि को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, बहुमत परीक्षण के आदेश से यह भी माना गया कि इससे रावत की छवि को हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई भी हुई है।
बहुमत परीक्षण का ही सबब है कि बुधवार को कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी भी देहरादून पहुंच रही हैं। सूत्रों का कहना है कि पार्टी प्रभारी किसी भी सूरत में कांग्रेस के बागी विधायकों से बात करने के मूड में नहीं है।