लल्लन की हालत देख स्वास्थ्य मंत्री पर बरसे पूर्व सीएम रावत
- सब कुछ सुधारा, बस ‘सेहत’ नहीं सुधार पाया
- पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने माना नहीं हो पाया स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
- प्रदेश में हेल्थ सेक्टर की योजनाओं का नहीं हुआ ठीक ढंग से क्रियान्वयन
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शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पूरे राज्य के तीन सबसे प्रमुख मुद्दे हैं। अपने मुख्यमंत्रित्व काल में मैंने हर सेक्टर में सुधार के प्रयास किए। सब जगह व्यवस्थाओं में सुधार हुआ लेकिन हेल्थ सेक्टर की अव्यवस्थाएं कम नहीं हो सकी।
सोमवार को घायल भाजपा कार्यकर्ता लल्लन सिंह को देखने सीएमआई अस्पताल पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हेल्थ सेक्टर में सुधार के लिए योजनाओं का ठीक से क्रियान्वयन किया जाना बेहद जरूरी है।
अमर उजाला से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को कई बार निर्देश दिए। यहां तक कि उन्हें एक हेलीकॉप्टर तक उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
स्वास्थ्य मंत्री ने नहीं दिखाई कोई दिलचस्पी
हेलीकॉप्टर की मदद से स्वास्थ्य मंत्री सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को पहाड़ के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाए। हफ्ते भर तक अलग-अलग क्षेत्रों में इन चिकित्सकों के कैंप लगाए जाएं, जिससे वहां के लोगों को बेहतर उपचार मिल सके।
डॉक्टरों के ठहरने के लिए बढ़िया क्वालिटी के टेंट खरीदने को भी मंजूरी दी। लेकिन उन्होंने इसे करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन पर फैसला लेकर हमने चिकित्सकों को बेहतर सेवा के लिए प्रोत्साहित किया।
पहाड़ में फार्मासिस्टों को दवा देने के अधिकार की वकालत
पहाड़ के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में नए चिकित्सकों को तैनात करने के लिए पहले ही डीएसीपी का लाभ देने पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने पहाड़ में फार्मासिस्टों को दवा देने के अधिकार की वकालत की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बिना दवा और उपचार के दम तोड़ने वाले लोगों को कम से उपचार और दवा तो मिल सकेगी। साथ ही आशाओं और दाईयों को हेल्थ सर्विसेज में शामिल करने को कार्य किया। उन्होंने युवाओं के लिए आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी सेवाओं का प्रशिक्षण देने की आवश्यकता भी जताई।
बोले हरीश रावत: पीपीपी अस्पतालों की सीबीआई जांच जरूरी
शुरूआत से ही विवादों में रही अस्पतालों को पीपीपी मोड पर संचालित करने की योजना पर पूर्व मुख्यमंत्री ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पीपीपी का कांसेप्ट शुरू किया, कंपनियां उस पर खरी नहीं उतर सकी।
पीपीपी के नाम पर जो हुआ, उसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। उन्होंने माना कि इस योजना से मरीजों को उस स्तर पर लाभ नहीं मिल सका, जिसको ध्यान में रखते हुए योजना तैयार की गई थी।
एमएसबीवाई में लगेंगे दो साल
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पौने दो लाख रुपए का बीमा कवर उपलब्ध कराने की कवायद चल रही है। इसके पूरी तरह क्रियान्वन में कम से कम दो साल का समय लगेगा।
उन्होंने कहा कि बीमा योजना से पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों के लोग भी जुड़ेंगे। इससे बड़े अस्पताल भी पहाड़ों में अपनी शाखाएं खोलेंगे। उनके पास पर्याप्त मरीज होंगे तो वह बेहतर सुविधाएं भी दे सकेंगे।