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फिसड्डी भारत के सिर पर चीन
उत्तरकाशी/सूरत सिंह रावत
Updated Sun, 28 Jul 2013 12:20 PM IST
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लद्दाख ही नहीं, उत्तराखंड से लगी सीमा पर भी चीन की चहलकदमी जारी है। भारतीय चरवाहों ने बाड़ाहोती क्षेत्र में चीनियों की मौजूदगी देखी है। इस बाबत वहां तैनात आईटीबीपी को भी सूचित किया है। चीन ने सीमा तक शानदार सड़कें भी बना ली हैं।
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दूसरी ओर हमारी तैयारियों का आलम यह है कि चीन सीमा तक पगडंडी भी बनानी दुश्वार हो रही है। ऐसे में किसी आपात स्थिति में वहां तक फौज और रसद कैसे पहुंचेगी इसे समझा जा सकता है।
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भैरोंघाटी से आगे भारतीय सेना की अग्रिम चौकियों को घेरने की चीन की तैयारियों की चुनौतियों से निपटने में भारत पिछड़ रहा है। गंगोत्री हाईवे को 41 दिन में भी नहीं खोला जा सका।
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इससे आगे भैरोंघाटी से नेलांग, नागा, नीलापाणी तक 42 किमी बार्डर रोड तो बंद पड़ी है। वहीं सीमा चौकियों की ओर जाने वाली पगडंडियों से पहुंचना भी भारतीय सेना के लिए दुश्वार बना हुआ है। ऐसे में किसी आपात स्थिति में सेना और रसद कैसे पहुंचेगी आसानी से समझा जा सकता है।
सीमावर्ती दर्रों तक सड़कें बना चुका है चीन
उत्तरकाशी के सीमावर्ती दर्रों टी-संचकुला, थांगला एक तथा मुनिंगला के नजदीक चीन हाईवे तैयार कर चुका है। लेटलतीफी और संसाधनों का रोना रो रहे बीआरओ और गंगोत्री नेशनल पार्क की बंदिशों के कारण 42 किमी नीलापानी तक ही सड़क बन पाई।
16-17 जून की आपदा में यह सड़क अब इस कदर तहस-नहस हो गयी कि पागल नाला, हवा बैंड तीन किमी सहित अन्य कई हिस्से पैदल आवजाही लायक नहीं रहे गए हैं। नीलापाणी से मुनिंगला के पास 34 किमी सहित टी-सांचकुला तथा सुमला से थांगला पास के लिए 22 किमी सड़क का प्रस्ताव मार्च से नेशनल वाईल्ड लाइफ बोर्ड के पास पड़ा है।
सड़कें निर्माणाधीन लेकिन काम नहीं चल रहा
बार्डर की ओर सोनम से पीडीए 13.5 किमी, पीडीए से मंडी 4 किमी तथा पीडीए से सुमला 4.55 किमी सड़कें निर्माणाधीन तो है, किंतु इस पर काम नहीं चल पा रहा है। निर्माणाधीन सड़क के कई हिस्से तहस-नहस हैं।
सड़क से आगे भारतीय सेना की पेट्रोलिंग के लिए 19, 15 तथा 14 किमी तीन पगडंडियों का निर्माण भी ठप है। सूत्रों के अनुसार बार्डर पर स्थिति ऐसी है कि पेट्रोलिंग पर जाने वाले जवानों को कई किमी तक एक फीट से कम चौडाई के चट्टानी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है।
यहां फौज का भारी हथियारों को लेकर जाना तो दूर, खाली हाथ पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है। गंगोत्री नेशनल पार्क के उपनिदेशक जीएन यादव का कहना है कि सेना की पेट्रोलिंग के लिए 48 किमी ट्रैक के लिए बजट न मिलने से काम नहीं हो पा रहा है।
क्या कहतें हैं अधिकारीः
'उत्तरकाशी से आगे हाईवे पर 15 मशीनें तो हैं, हार्ड रॉक होने से सड़क यातायात लायक तैयार करने में अड़चन आ रही है।'
चंद्रशेखर, बीआरओ कमांडर
'बीआरओ की कुछ मशीनें बार्डर की ओर फंसी हैं। जितना समय गंगोत्री हाईवे पर यातायात बहाल करने में लगेगा उससे ज्यादा भैरों घाटी से आगे बार्डर रोड पर लग सकता है।'
डा. पंकज पांडे, डीएम उत्तरकाशी