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केदारनाथ आपदा: तीन साल में भी नहीं सुधरी स्थिति
संदीप थपलियाल/ अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Mon, 23 May 2016 06:34 PM IST
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केदारनाथ आपदा
- फोटो : file photo
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केदारनाथ जलप्रलय के करीब तीन साल बाद भी औद्यानिक प्रशिक्षण एवं परीक्षण प्रक्षेत्र को बचाने के लिए शासन ने एक भी धेला खर्च नहीं किया है।
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नतीजन यहां बचे-खुचे पेड़-पौधे भी खत्म हो रहे हैं। प्रक्षेत्र को आवारा जानवरों ने अपना अड्डा बना लिया है। सुरक्षा दीवार नहीं होने से प्रक्षेत्र की भूमि भी अतिक्रमण की चपेट में हैं। कार्रवाई के नाम पर दो बार शासन को इस्टीमेट भेजने के बाद भी बजट नहीं मिल पा रहा है।
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वर्ष 1972 में उद्यान विभाग की ओर से श्रीनगर में अलकनंदा नदी किनारे 4.8 हेक्टेअर (220 नाली) भूमि में औद्यानिक प्रशिक्षण एवं परीक्षण प्रक्षेत्र स्थापित किया गया। इस प्रक्षेत्र (नर्सरी) में फल और सब्जी पौध तैयार करने के साथ ही फल-सब्जी उत्पादन होता था।
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जून 2013 में अलकनंदा नदी में आई बाढ़ के मलबे ने प्रक्षेत्र की छह फीट ऊंची सुरक्षा दीवार को तोड़ दिया। मलबे से आड़ू, बेल और करोंदे के पेड़ दब गए। बचे पेड़-पौधे भी सुरक्षा के अभाव में नष्ट हो रहे हैं। वर्तमान में प्रक्षेत्र के छोटे से हिस्से में मामूली तौर पर सब्जी उत्पादन किया गया है।
उद्यान विभाग ने वर्ष 2013 में प्रक्षेत्र की सुरक्षा दीवार और अन्य कार्यों के लिए 62 लाख और वर्ष 2015 में पुन: 80 लाख रुपये का इस्टीमेट भेजा गया। यह भी शासन में धूल खा रहा है।
अतिक्रमणकारियों की गिद्ध नजर
श्रीनगर। समय रहते प्रक्षेत्र की चाहरदवारी नहीं की गई, तो अतिक्रमणकारी जगह-जगह से इसमें कब्जा कर देंगे। कुछ लोगों ने प्रक्षेत्र से घर जाने का रास्ता बना दिया है। वहीं कुछ लोग पॉलीहाउस के ढांचों में कपड़े सूखा रहे हैं। प्रक्षेत्र की सीमा में लगाए गए पेड़ भी शरारती तत्व काट कर ले गए। प्रक्षेत्र के एक हिस्से में कूड़ा निस्तारण भी किया जाने लगा है।
सुरक्षा दीवार के अभाव में दिक्कत हो रही है। जानवर पूरी मेहनत बर्बाद कर रहे हैं। जैसे ही सब्जी की पौध तैयार होती हैं, जानवर खोदकर उखाड़ देते हैं। अतिक्रमण और पेड़ काटने के संबंध में पुलिस से भी शिकायत की जा चुकी है।
- पुरुषोत्तम बडोनी, प्रभारी औद्यानिक प्रशिक्षण एवं परीक्षण प्रक्षेत्र श्रीनगर