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लॉकडाउन के भय से अपने गांव लौट रहे मजदूर
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चंपावत। बिहार के बेतिया के मनोज कुमार, राजीव, चंद्र कुमार, रमेश, गिरीश कुमार, रामबाबू, अश्वनी, जोगेंद्र से लेकर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर, खीरी के मनसुख, रबीश, कालू आदि मजदूर रोडवेज स्टेशन में डेढ़ घंटे से बस का इंतजार कर रहे हैं।
उनकी चाहत बस एक अदद सीट की है। लंबे इंतजार के बाद एक बस आती है और जगह मिलने पर वे उनमें सवार हो राहत की सांस लेते हैं। इस दौरान बातचीत में ये मजदूर कहते हैं कि कोरोना के बिगड़ने और लॉकडाउन के अंदेशे से अब यहां रहने में खतरा महसूस कर रहे हैं।
ये मजदूर बताते हैं कि पिछले दस दिन से काम की भी भारी कमी हो गई है। काम की कमी के चलते कमाई नहीं होने से खाने के भी लाले पड़ रहे हैं। लिहाजा निर्माण कार्य से जुड़े ये श्रमिक यहां से जाने में भलाई समझ रहे हैं। शनिवार को चंपावत और लोहाघाट से 70 से ज्यादा मजदूर अपने-अपने घरों के लिए रवाना हुए।
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उनकी चाहत बस एक अदद सीट की है। लंबे इंतजार के बाद एक बस आती है और जगह मिलने पर वे उनमें सवार हो राहत की सांस लेते हैं। इस दौरान बातचीत में ये मजदूर कहते हैं कि कोरोना के बिगड़ने और लॉकडाउन के अंदेशे से अब यहां रहने में खतरा महसूस कर रहे हैं।
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ये मजदूर बताते हैं कि पिछले दस दिन से काम की भी भारी कमी हो गई है। काम की कमी के चलते कमाई नहीं होने से खाने के भी लाले पड़ रहे हैं। लिहाजा निर्माण कार्य से जुड़े ये श्रमिक यहां से जाने में भलाई समझ रहे हैं। शनिवार को चंपावत और लोहाघाट से 70 से ज्यादा मजदूर अपने-अपने घरों के लिए रवाना हुए।
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