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नदी किनारे स्कूलों में तैयार हो रही भविष्य के सपनों की जमीन

Mon, 01 Apr 2019 11:20 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत। Published by: बृजमोहन बृजमोहन Updated Mon, 01 Apr 2019 11:20 PM IST
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workers children are getting education in schools
टनकपुर में शारदा नदी के किनारे खनन मजदूरों के बच्चों को पढ़ाते शिक्षक देवीदत्त जोशी। - फोटो : अमर उजाला

भीषण गर्मी मेें काम करने वाले खनन मजदूरों को अपने बच्चों के भविष्य की फिक्र है। टनकपुर की शारदा नदी और चल्थी की लधिया नदी के किनारे बने अस्थाई स्कूलों में खनन मजदूरों के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इस अस्थाई पाठशाला में मौजूदा शिक्षण सत्र में 30 अप्रैल तक पढ़ाई होगी। इस स्कूल में न बैठने को कमरा है और न ही फर्नीचर। बस एक ब्लैकबोर्ड और नदी किनारे रोखड़ में टाट-पट्टी पर बैठकर ये बच्चे भविष्य संवार रहे हैं। 

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शिक्षा विभाग के जिला समन्वयक मोहन सेलिया का कहना है कि गैर आवासीय विशिष्ट प्रशिक्षण (एनआरएसटी) कार्यक्रम के तहत 427 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मकसद किसी भी रूप में स्कूली शिक्षा से वंचित छात्र-छात्राओं को शिक्षण व्यवस्था मुहैया कराना है।
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इन बच्चों को गैडाखाली, नायकगोठ, कालाझाला, चल्थी के प्राथमिक स्कूलों से संबद्ध किया गया है। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, बरेली, बदायूं, शहाजहांपुर, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी आदि जिलों से खनन मजदूरी के लिए आने वाले सैकड़ों माता-पिताओं के साथ ये बच्चे भी यहां आए हैं। अक्तूबर से बरसात शुरू होने से पूर्व तक खनन का काम होता है।
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माता-पिता खनन कारोबार से परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं तो इन बच्चों को टनकपुर में शारदा नदी के किनारे ही अस्थाई रूप से बनाए गए स्कूल में शिक्षा दी जा रही है। शिक्षक देवीदत्त जोशी बताते हैं कि छह से 14 आयु वर्ग के इन छात्रों को कक्षावार नहीं बल्कि सामूहिक रूप से पढ़ाई कराई जाती है। यहां पढ़ाई करने वाले को विभाग की ओर से प्रमाणपत्र दिया जाता है जिससे इन छात्र-छात्राओं का अगली कक्षा में दूसरे स्कूलों में प्रवेश हो सके। 



एनआरएसटी कार्यक्रम के तहत जिले में 450 बच्चों को पढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन इस वक्त खनन श्रमिकों के 427 बच्चे पढ़ रहे हैं। इन छात्रों की पढ़ाई के लिए 2019-19 में 13.50 लाख रुपये स्वीकृत हुआ जिसमें से 10.50 लाख अवमुक्त हो चुका है। 
सत्यनारायण, जिला शिक्षाधिकारी, चंपावत।

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