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महिलाओं और बच्चों पर पड़ती है विस्थापन की सबसे अधिक मार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Fri, 03 Mar 2017 10:27 PM IST
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महिलाओं और बच्चों पर पड़ती है विस्थापन की सबसे अधिक मार
- फोटो : अमर उजाला
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यहां इंडो नेपाल ज्वाइंट फोरम की ओर से प्रस्तावित पंचेश्वर बांध को लेकर आयोजित कार्यशाला में विस्थापितों के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया। कहा गया कि विस्थापन की सबसे अधिक पीड़ा महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ती है। विस्थापन की मार दोनों देशों के 23 गांव के लोगों को झेलनी पड़ेगी।
शुक्रवार को एक होटल में आयोजित कार्यशाला में आयोजकों ने महाकाली बेसिन में बसे दोनों देशों के समुदायों के साथ सीधा संवाद किया गया। एनवीरोनिक्स ट्रस्ट और उत्तरांचल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (यूडीआई) के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में कहा गया कि बांध निर्माण के दौरान विस्थापन की मुख्य पीड़ा महिलाओं और बच्चों को झेलना पड़ती है।
बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के निवासियों के विस्थापन की ठोस कार्ययोजना तैयार किया जाना जरूरी है। इंडो नेपाल ज्वाइंट फोरम के अध्यक्ष डा. श्रीधर की अध्यक्षता में हुई कार्यशाला में नेपाल के एक दैनिक के ब्यूरो प्रमुख चित्रांग थापा ने कहा कि परियोजना के पूर्ण होते ही सरकार भी अपने कार्य को पूर्ण मान लेती है और उजड़े विस्थापितों को मंझधार में छोड़ दिया जाता है।
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कार्यशाला में दोनों देशों के बीच रोटी और बेटी का रिश्ता होने का भावनात्मक मसला भी उठा। कहा गया कि किसी भी तरह के नीतिगत फैसले लेने और कार्ययोजना तैयार करने में स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी होनी चाहिए। एनवीरोनिक्स ट्रस्ट और यूडीआई संस्था की ओर से अब तक विभिन्न चरणों में किए गए अध्ययन की रिपोर्ट सभी समुदायों के साथ साझा की। तेज सिंह भंडारी और निशांत के संचालन में दो सत्रों में चली कार्यशाला में फोरम के अशोक विक्रम, सुरेश खर्कवाल, विक्रम सिंह भंडारी, दिनेश सिंह आदि ने विचार रखे।
रीठा साहिब में कल, सेराघाट में सात को होगी गोष्ठी
यूडीआई संस्था की ओर से पंचेश्वर बांध प्रभावितों के साथ ही अन्य स्थानों में भी नदी घाटियों के बुनियादी विकास के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। यूडीआई के तेज सिंह भंडारी ने बताया कि पांच मार्च को चंपावत जिले के रीठा साहिब में विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। अल्मोड़ा जिले के सेरा घाट में सात मार्च को जागरूकता गोष्ठी होगी।
शुक्रवार को एक होटल में आयोजित कार्यशाला में आयोजकों ने महाकाली बेसिन में बसे दोनों देशों के समुदायों के साथ सीधा संवाद किया गया। एनवीरोनिक्स ट्रस्ट और उत्तरांचल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (यूडीआई) के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में कहा गया कि बांध निर्माण के दौरान विस्थापन की मुख्य पीड़ा महिलाओं और बच्चों को झेलना पड़ती है।
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बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के निवासियों के विस्थापन की ठोस कार्ययोजना तैयार किया जाना जरूरी है। इंडो नेपाल ज्वाइंट फोरम के अध्यक्ष डा. श्रीधर की अध्यक्षता में हुई कार्यशाला में नेपाल के एक दैनिक के ब्यूरो प्रमुख चित्रांग थापा ने कहा कि परियोजना के पूर्ण होते ही सरकार भी अपने कार्य को पूर्ण मान लेती है और उजड़े विस्थापितों को मंझधार में छोड़ दिया जाता है।
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कार्यशाला में दोनों देशों के बीच रोटी और बेटी का रिश्ता होने का भावनात्मक मसला भी उठा। कहा गया कि किसी भी तरह के नीतिगत फैसले लेने और कार्ययोजना तैयार करने में स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी होनी चाहिए। एनवीरोनिक्स ट्रस्ट और यूडीआई संस्था की ओर से अब तक विभिन्न चरणों में किए गए अध्ययन की रिपोर्ट सभी समुदायों के साथ साझा की। तेज सिंह भंडारी और निशांत के संचालन में दो सत्रों में चली कार्यशाला में फोरम के अशोक विक्रम, सुरेश खर्कवाल, विक्रम सिंह भंडारी, दिनेश सिंह आदि ने विचार रखे।
रीठा साहिब में कल, सेराघाट में सात को होगी गोष्ठी
यूडीआई संस्था की ओर से पंचेश्वर बांध प्रभावितों के साथ ही अन्य स्थानों में भी नदी घाटियों के बुनियादी विकास के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। यूडीआई के तेज सिंह भंडारी ने बताया कि पांच मार्च को चंपावत जिले के रीठा साहिब में विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। अल्मोड़ा जिले के सेरा घाट में सात मार्च को जागरूकता गोष्ठी होगी।