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जिला अस्पताल में पहली बार हुआ अल्ट्रासाउंड गाइडेड ऑपरेशन
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चंपावत जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मदद से महिला का ऑपरेशन करती डॉक्टरों की टीम।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन के बाद अब जिला अस्पताल ने अल्ट्रासाउंड गाइडेड ऑपरेशन कर मरीज को राहत पहुंचाई है। ऑपरेशन के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है।
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बिष्ट ने बताया कि इस तकनीक में अल्ट्रासाउंड की तस्वीर की मदद से ऑपरेशन किया जाता है। जिला अस्पताल में पहला अल्ट्रासाउंड गाइडेड ऑपरेशन है। इस ऑपरेशन का निजी अस्पताल में 75 हजार से सवा लाख रुपये तक खर्च आता है।
रीठा साहिब क्षेत्र के मछियाड़ गांव के नरेंद्र बोहरा की गर्भवती पत्नी निर्मला बोहरा (22) को प्रसव पीड़ा होने पर 17 जून को जिला अस्पताल लाया गया। इलाज के बाद अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा गया रेडियोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बिष्ट ने अल्ट्रासाउंड किया, तो जांच में पता चला कि महिला की मोलर गर्भावस्था है।
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इसलिए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका चौहान ने गर्भाशय की सफाई की, लेकिन अल्ट्रासाउंड की दोबारा जांच करने के बाद पता चला कि अब भी कुछ कोशिकाएं बच गईं।
इसके बाद डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड गाइडेड ऑपरेशन किया। पीएमएस डॉ. आरके जोशी ने बताया कि सर्जन डॉ. राहुल चौहान, गायनाकोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट की टीम ने ऑपरेशन कर गर्भाशय से कोशिकाओं को निकाला।
मोलर गर्भावस्था में विकसित नहीं होतीं कोशिकाएं
चंपावत। मोलर गर्भावस्था में सामान्य गर्भावस्था के लक्षण जैसे प्रतीत होते हैं, लेकिन गर्भ की कोशिकाएं पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाती है। मांस का एक टुकड़ा गर्भाशय में बड़ा होता जाता है। इससे गर्भवती की जान को खतरा होता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित अंतराल पर अल्ट्रासाउंड परीक्षण बेहद जरूरी है। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बिष्ट ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को खतरों से बचने के लिए तीन माह के अंतराल में जरूर अल्ट्रासाउंड करवाना चाहिए, लेकिन निर्मला ने छठे माह में अल्ट्रासाउंड कराया।
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रेडियोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बिष्ट ने बताया कि इस तकनीक में अल्ट्रासाउंड की तस्वीर की मदद से ऑपरेशन किया जाता है। जिला अस्पताल में पहला अल्ट्रासाउंड गाइडेड ऑपरेशन है। इस ऑपरेशन का निजी अस्पताल में 75 हजार से सवा लाख रुपये तक खर्च आता है।
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रीठा साहिब क्षेत्र के मछियाड़ गांव के नरेंद्र बोहरा की गर्भवती पत्नी निर्मला बोहरा (22) को प्रसव पीड़ा होने पर 17 जून को जिला अस्पताल लाया गया। इलाज के बाद अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा गया रेडियोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बिष्ट ने अल्ट्रासाउंड किया, तो जांच में पता चला कि महिला की मोलर गर्भावस्था है।
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इसलिए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका चौहान ने गर्भाशय की सफाई की, लेकिन अल्ट्रासाउंड की दोबारा जांच करने के बाद पता चला कि अब भी कुछ कोशिकाएं बच गईं।
इसके बाद डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड गाइडेड ऑपरेशन किया। पीएमएस डॉ. आरके जोशी ने बताया कि सर्जन डॉ. राहुल चौहान, गायनाकोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट की टीम ने ऑपरेशन कर गर्भाशय से कोशिकाओं को निकाला।
मोलर गर्भावस्था में विकसित नहीं होतीं कोशिकाएं
चंपावत। मोलर गर्भावस्था में सामान्य गर्भावस्था के लक्षण जैसे प्रतीत होते हैं, लेकिन गर्भ की कोशिकाएं पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाती है। मांस का एक टुकड़ा गर्भाशय में बड़ा होता जाता है। इससे गर्भवती की जान को खतरा होता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित अंतराल पर अल्ट्रासाउंड परीक्षण बेहद जरूरी है। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बिष्ट ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को खतरों से बचने के लिए तीन माह के अंतराल में जरूर अल्ट्रासाउंड करवाना चाहिए, लेकिन निर्मला ने छठे माह में अल्ट्रासाउंड कराया।