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बच्चों को खेल-खेल में मिलीं महाभारत काल की दो प्राचीन सुरंगें, देखकर हर कोई हैरान

Sun, 12 Jan 2020 11:36 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंपावत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंपावत Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Sun, 12 Jan 2020 11:36 AM IST
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Two ancient tunnels found in Gaudi Village of uttarakhand
प्राचीन सुरंग।

उत्तराखंड के चंपावत से सात किमी दूर गौड़ी गांव में दो सुरंगों का पता चला है। इनमें एक बंद है। खुली सुरंग की लंबाई करीब 800 मीटर है। यह गौड़ी से गंडक नदी पर खुलती है। पांच दशक पहले तक लोग इसका इस्तेमाल नदी से पानी भरने के लिए करते थे। इतिहासकार इन प्राचीन सुरंगों को चंद या महाभारत काल से जोड़ कर देख रहे हैं।

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गोपाल सिंह और नाथ सिंह बताते हैं कि खेल-खेल में कुछ दिन पूर्व कुछ बच्चे वहां तक पहुंच गए। एक सुरंग का मुहाना बंद है, जबकि खुली सुरंग करीब 6 से 8 फीट व्यास की है। ग्रामीणों का कहना है कि दूसरी सुरंग संभवत: मलबे से बंद हुई होगी। उनके पूर्वजों के दौर तक इन सुरंगों का इस्तेमाल होता था।
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सुरंग में सीढ़ियां भी बनीं थीं। इन सीढ़ियों का उपयोग ग्रामीण नदी से पानी भर कर लाने में करते थे। बाद में जब सुरंग से जानवर गिरने लगे, तो ग्रामीणों ने एक का उपयोग बंद कर दिया।

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दूसरी तरफ चंद राजा का शासन था

ग्रामीण बताते हैं कि प्राचीन समय में इस स्थान पर चिंता सिंह का राज हुआ करता था। इस स्थान को चिंता कोट कहा जाता था जबकि गौड़ी के दूसरी तरफ चंद राजा का शासन था, जिसका बसान गांव में मंदिर भी बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक हो सकता है कि इन सुरंगों का संबंध प्राचीन राजाओं से हो।

सुरंगों का बारीक वैज्ञानिक विश्लेषण जरूरी : डॉ. प्रशांत
चंपावत राजकीय महाविद्यालय के इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रशांत जोशी इन सुरंगों को दो तरीके से देखते हैं। उनका मानना है कि पहली नजर में इनका संबंध महाभारत काल या चंद राजाओं से प्रतीत होता है।

डॉ. जोशी का कहना है कि गौड़ी क्षेत्र से कुछ किमी दूर घटोत्कच, हिडिंबा, मानेश्वर जैसे प्राचीन महत्व के देव स्थल हैं। अज्ञातवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में रहे थे। हो सकता है उन्होंने इस दौरान इन सुरंगों का उपयोग छिपने के लिए किया हो। इसके अलावा काली कुमाऊं में 1365 से 1420 तक चंद राजवंश के ज्ञानी चंद का उल्लेख इस क्षेत्र में मिलता है।

हो सकता है उस समय नेपाल के राजाओं से मुकाबला करने के लिए इन गुप्त रास्तों का उपयोग किया जाता हो। इन रास्तों से हथियार और अन्य जरूरी सामग्री ले जाई जाती हो। अलबत्ता, उनका कहना है कि किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए इन सुरंगों के बारीक वैज्ञानिक विश्लेषण की जरूरत है।

जिम कार्बेट के गौड़ी में नरभक्षी बाघ को मारने से यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। अमर उजाला से सुरंगों की जानकारी मिलने के बाद विशेषज्ञों के साथ प्रशासन की टीम को इसके निरीक्षण के लिए भेजा जाएगा। अगर ये सुरंगें ऐतिहासिक महत्व की होंगी, तो पुरातत्व और पर्यटन विभाग से मंत्रणा कर इन्हें विकसित किया जाएगा।
- सुरेंद्र नारायण पांडेय, जिलाधिकारी चंपावत।

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