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डेढ़ साल बाद भी ट्रामा सेंटर में लटके ताला
अमर उजाला ब्यूरो लोहाघाट
Updated Thu, 11 May 2017 10:19 PM IST
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हाथी दांत बना लोहाघाट का ट्रामा सेंटर भवन।
- फोटो : अमर उजाला
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बना ट्रामा सेंटर शोपीस बना हुआ है। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बने इस ट्रामा सेंटर के शुरू नहीं होने से लोगों को वक्त पर इलाज नहीं मिल सका। 2015 में भवन के हस्तांतरण के बावजूद इस भवन के कुछ कमरों में सीएचसी का कार्यालय संचालित हो रहा है।
ट्रामा सेंटर चालू होने से लोहाघाट, बाराकोट, पाटी के अलावा दूरदराज के काफी लोगों को भी इसका लाभ मिलता। ट्रामा सेंटर के लिए एक भी पद की स्वीकृति नहीं हुई है।
ऑर्थोसर्जन, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, निश्चेतक सहित एक भी डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी है। ट्रामा सेंटर के शुरू न होने से दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल होने वाले रोगियों को प्राथमिक इलाज के बाद हायर सेंटर भेजा जाता है, जिनमें से काफी लोगों की रास्ते में ही मौत हो जाती हैं।
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ट्रामा सेंटर भवन विभाग को हस्तांतरित करने के बाद करीब डेढ़ वर्ष के दौरान क्षेत्र में हुई दुर्घटनाओं में करीब छह लोगों ने समय पर इलाज न मिलने के चलते दम तोड़ दिया था। क्षेत्रीय लोगों, जन प्रतिनिधियों ने ट्रामा सेंटर का संचालन शुरू करने की मांग को लेकर कई बार आवाज उठाई, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है।
लोहाघाट में ट्रामा केयर यूनिट का भवन बना है, जिसे ट्रामा सेंटर का नाम दिया गया है। इसके संचालन के लिए शासन स्तर से पद स्वीकृत होते हैं। पदों के स्वीकृति होने के बाद ही यहां डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी। ट्रामा सेंटर के संचालन के लिए शासन स्तर पर लगातार पत्राचार किया जाता रहा है। टनकपुर व लोहाघाट दोनों स्थानों में बने ट्रामा सेंटर चालू नहीं हो सके हैं। -डॉ. डीएल शाह, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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ट्रामा सेंटर चालू होने से लोहाघाट, बाराकोट, पाटी के अलावा दूरदराज के काफी लोगों को भी इसका लाभ मिलता। ट्रामा सेंटर के लिए एक भी पद की स्वीकृति नहीं हुई है।
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ऑर्थोसर्जन, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, निश्चेतक सहित एक भी डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी है। ट्रामा सेंटर के शुरू न होने से दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल होने वाले रोगियों को प्राथमिक इलाज के बाद हायर सेंटर भेजा जाता है, जिनमें से काफी लोगों की रास्ते में ही मौत हो जाती हैं।
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ट्रामा सेंटर भवन विभाग को हस्तांतरित करने के बाद करीब डेढ़ वर्ष के दौरान क्षेत्र में हुई दुर्घटनाओं में करीब छह लोगों ने समय पर इलाज न मिलने के चलते दम तोड़ दिया था। क्षेत्रीय लोगों, जन प्रतिनिधियों ने ट्रामा सेंटर का संचालन शुरू करने की मांग को लेकर कई बार आवाज उठाई, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है।
लोहाघाट में ट्रामा केयर यूनिट का भवन बना है, जिसे ट्रामा सेंटर का नाम दिया गया है। इसके संचालन के लिए शासन स्तर से पद स्वीकृत होते हैं। पदों के स्वीकृति होने के बाद ही यहां डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी। ट्रामा सेंटर के संचालन के लिए शासन स्तर पर लगातार पत्राचार किया जाता रहा है। टनकपुर व लोहाघाट दोनों स्थानों में बने ट्रामा सेंटर चालू नहीं हो सके हैं। -डॉ. डीएल शाह, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।