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टनकपुर अस्पताल की कमियों से शांति व्यवस्था को खतरा

Sun, 03 Sep 2017 10:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। Updated Sun, 03 Sep 2017 10:24 PM IST
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Threat to peace system with the shortcomings of Tanakpur Hospital
टनकपुर का संयुक्त अस्पताल भवन। - फोटो : अमर उजाला
 जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर के संयुक्त अस्पताल की हालत इलाज करने लायक नहीं है, बल्कि यह अस्पताल खुद लोगों के लिए सिरदर्द बन रहा है। और तो और अस्पताल की कमियां शांति व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकती है। ये अंदेशा खुद टनकपुर के उप जिला मजिस्ट्रेट अनिल कुमार चन्याल ने अपनी रिपोर्ट में जताया है। उन्होंने अस्पताल की इस रिपोर्ट को जिलाधिकारी, स्वास्थ्य निदेशक व मुख्य चिकित्साधिकारी को भेजा है। 
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अस्पताल में 30 अगस्त को हुई बैठक के बाद तैयार एसडीएम की रिपोर्ट में अस्पताल की कई खामियां उजागर हुई है। 2006 से आज तक अनुदान के रूप में अस्पताल को एक भी रुपया नहीं मिला है। अनुरक्षण के लिए भी मौजूदा वित्त वर्ष में महज 15 हजार रुपये का बजट अवमुक्त किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्टरों की भारी कमी मरीजों के लिए मुसीबत पैदा कर रही है। 15 डॉक्टरों के सापेक्ष यहां दो संविदा चिकित्सकों समेत महज छह डॉक्टर ही तैनात हैं। बीते एक वर्ष से अस्पताल में महिला चिकित्साधिकारी नहीं है। जिससे महिलाओं को काफी दिक्कतें हो रही है। एक्सरे तकनीशियन भी नहीं है। 
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सड़क दुर्घटना में चोटिल हुए दृष्टिमितिज्ञ की शारीरिक अवस्था ठीक नहीं होने से भी काम प्रभावित होने की बात कही गई है। अस्पताल में कुत्ते के काटने में लगाए जाने वाले एंटीरैबीज वैक्सीन (एआरवी) तक नहीं है। इसके अलावा पोस्टमार्टम हाउस में शव रखने के लिए लगा डिफ्रीजर भी कई दिनों से खराब है। एसडीएम की रिपोर्ट में अस्पताल की बदहाली से शहर के लोगों में आक्रोश होने के चलते कभी भी शांति व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा जताया गया है। 
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न एक्सरे, न ईसीजी, न अल्ट्रासाउंड 
चंपावत। टनकपुर का संयुक्त अस्पताल भवन कई करोड़ रुपये से बना है। अस्पताल में भवन से लेकर उपकरण तक सब कुछ है, मगर इलाज नहीं। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं, तो कार्डियोलॉजिस्ट की कमी से ईसीजी प्रभावित हो रहे हैं। और तो और अब यहां बीते एक महीने से एक्सरे जैसी सामान्य सुविधा भी बंद हो गई है। अस्पताल में फि जिशियन, अस्थि रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, महिला चिकित्साधिकारी सहित कई डॉक्टरों के पद खाली हैं। खुद मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.एचएस हयांकी, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. घनश्याम तिवारी व डॉ. दीपक गहतोड़ी के स्थानांतरण आदेश हो चुके हैं। अलबत्ता उनके स्थान पर यहां तैनाती किसी की नहीं हुई है। इनके यहां से रिलीव होेने पर अस्पताल  में निश्चेतक डॉ.हेमंत शर्मा व दो संविदा डॉक्टर ही रह जाएंगे। एक्सरे तकनीशियन के तबादले के बाद यहां भेजे गए तकनीशियन को दूसरी जगह संबद्ध कर दिया गया। जिससे एक्सरे होना भी बंद हो गया है। 


कोट 
अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी से इलाज में दुश्वारी आ रही है। फिजीशियन, अस्थि रोग विशेषज्ञ जैसे कई महत्वपूर्ण पद तो खाली है ही, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी महिला चिकित्साधिकारी के नहीं होने से हो रही है। अल्ट्रासाउंड, ईसीजी और एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं। व्यवस्था सुधारने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। 
डॉ.एचएस हयांकी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, संयुक्त अस्पताल, टनकपुर।
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