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कंप्यूटर कोर्स से संबंधित दस हजार से अधिक किताबें गोदाम में डंप
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
Updated Fri, 13 Apr 2018 10:33 PM IST
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चंपावत में कूड़े के ढेर रूप में तब्दील कंप्यूटर शिक्षा से संबंधित पुस्तकें।
- फोटो : अमर उजाला
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शिक्षा विभाग की ओर से इन दिनों जहां सभी स्कूलों में एनसीटीईआर की किताबों को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने को लेकर विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ विभागीय लापरवाही के चलते दो पहले पूर्व कंप्यूटर साक्षरता कार्यक्रम के तहत क्रय की गई कंप्यूटर कोर्स की करीब दस हजार से अधिक किताबें शिक्षा विभाग के गोदामों में डंप पड़ी हुई हैं।
कंप्यूटर कोर्स की जानकारी देने वाली इन किताबों की खरीद पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में शिक्षा विभाग और कदम समिति की ओर से की गई थी। इनका वितरण माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत संचालित विद्यालयों को उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन दो सालों से यह पुस्तकें स्कूलों तक पहुंचने के बजाए विभाग के गोदाम में धूल फांक रही हैं। शिक्षा विभाग और कदम समिति की ओर से प्रकाशित कंप्यूटर कोर्स की एक किताब में 424 पेज हैं। इसमें कंप्यूटर शिक्षा की बुनियादी जानकारी से लेकर प्रयोगात्मक जानकारियां उपलब्ध हैं। अब ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि लाखों रुपये मूल्य की यह किताबें छात्र-छात्राओं हाथों में पहुंचाने के बजाए गोदामों में रखने केे लिए कौन जिम्मेदार है। विभागीय अधिकारी भी इसका सही जबाब नहीं दे पा रहे हैं।
तो पूर्व सीएम और शिक्षा मंत्री की फोटो बनी वजह
चंपावत। सूत्रों का कहना है कि कंप्यूटर कोर्स से संबंधित किताबों के आवरण पेज पर पूर्व सीएम हरीश रावत और पूर्व शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी की फोटो प्रकाशित की गई हैं। इसके चलते इन किताबों को स्कूलों में नहीं बंटवाया गया है।
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कोट
कंप्यूटर साक्षरता कार्यक्रम तके तहत दो साल पूर्व प्राप्त हुई पुस्तकों का पूर्व में स्कूलों में वितरण नहीं हो सका है। अब इन पुस्तकों को राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत संचालित स्कूलों के पुस्तकालयों को दिया जा रहा है।
आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षा अधिकारी, चंपावत।
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कंप्यूटर कोर्स की जानकारी देने वाली इन किताबों की खरीद पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में शिक्षा विभाग और कदम समिति की ओर से की गई थी। इनका वितरण माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत संचालित विद्यालयों को उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन दो सालों से यह पुस्तकें स्कूलों तक पहुंचने के बजाए विभाग के गोदाम में धूल फांक रही हैं। शिक्षा विभाग और कदम समिति की ओर से प्रकाशित कंप्यूटर कोर्स की एक किताब में 424 पेज हैं। इसमें कंप्यूटर शिक्षा की बुनियादी जानकारी से लेकर प्रयोगात्मक जानकारियां उपलब्ध हैं। अब ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि लाखों रुपये मूल्य की यह किताबें छात्र-छात्राओं हाथों में पहुंचाने के बजाए गोदामों में रखने केे लिए कौन जिम्मेदार है। विभागीय अधिकारी भी इसका सही जबाब नहीं दे पा रहे हैं।
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तो पूर्व सीएम और शिक्षा मंत्री की फोटो बनी वजह
चंपावत। सूत्रों का कहना है कि कंप्यूटर कोर्स से संबंधित किताबों के आवरण पेज पर पूर्व सीएम हरीश रावत और पूर्व शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी की फोटो प्रकाशित की गई हैं। इसके चलते इन किताबों को स्कूलों में नहीं बंटवाया गया है।
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कंप्यूटर साक्षरता कार्यक्रम तके तहत दो साल पूर्व प्राप्त हुई पुस्तकों का पूर्व में स्कूलों में वितरण नहीं हो सका है। अब इन पुस्तकों को राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत संचालित स्कूलों के पुस्तकालयों को दिया जा रहा है।
आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षा अधिकारी, चंपावत।