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पॉलिटेक्रिक के महिला छात्रावास के लिए नहीं हैं 36 लाख रुपये!

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Oct 2021 11:40 PM IST
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There is no Rs 36 lakh for polytechnic's women's hostel
लोहाघाट (चंपावत)। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा हर सरकार की प्राथमिकता में है, लेकिन महिलाओं की बेहतरी के लिए काम करने में अक्सर वे पीछे हैं। इसकी एक बानगी यहां के राजकीय पॉलीटेक्निक के महिला छात्रावास की तस्वीर है। सिर्फ 36.10 लाख रुपये की कमी से ये छात्रावास पूरा नहीं हो सका है। बीते नौ साल से इसका काम बंद है।
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छात्रावास न होने से छात्राओं को न केवल किराये में रहने को मजबूर होना पड़ता है, बल्कि उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। 2008 में पॉलीटेक्निक में 60 छात्राओं की क्षमता वाले 20 कमरे के दोमंजिला छात्रावास भवन का काम शुरू हुआ। एक करोड़ रुपये से सीएनडीएस (पेयजल निगम की निर्माण शाखा) ने दोमंजिले भवन का ढांचा तैयार कर लिया, लेकिन इस भवन की पहली मंजिल में न तो दरवाजे लगाए गए हैं और नहीं खिड़कियां। इस वजह से छात्रावास खंडहर में तब्दील हो रहा है। भवन के चारों ओर कंटीली झाड़ियां उग आईं हैं। संवाद
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बाकी हैं ये कार्य
फिनिशिंग, सैनिटरी, ड्रेनेज, वर्षा जल संरक्षण, दरवाजे, शीशे, पुताई, बिजली आदि।
दो कोट सादे
2008 में कार्यदायी संस्था ने महिला छात्रावास निर्माण शुरू किया था, लेकिन भवन अब भी तैयार नहीं हो सका है। छात्रावास का शेष काम जल्द पूरा करने के लिए बजट का आग्रह किया गया है।
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आर चंद्रा, प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलीटेक्निक, लोहाघाट।
बजट न मिलने से छात्रावास का काम अटका है। इसके लिए कई बार निदेशालय श्रीनगर को संशोधित आगणन भेजा गया है।
संजीव वर्मा, परियोजना प्रबंधक, सीएनडीएस, लोहाघाट।
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