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तब देवीधुरा में थीं चंद दुकानें

Tue, 25 Aug 2015 10:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट Updated Tue, 25 Aug 2015 10:43 PM IST
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मां बाराही धाम के बग्वाल के तौर-तरीके भले ही न बदले हो, लेकिन बीते चार दशक के दौरान यहां की व्यवस्थाओं में खासा बदलाव हुआ है। 40 वर्ष पूर्व यह स्थान सड़क मार्ग से नहीं जुड़ा था। यात्रा पैदल ही होती थी। संचार सुविधा से लेकर बिजली तक कुछ नहीं था। मेले में आने वाले आसपास के लोग करीब 7 दिन तक यहां रहते थे।

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चार दशक पहले तक देवीधुरा का कोई खास नाम नहीं था और न ही यहां संचार के कोई साधन थे। छह दुकानों वाला यह छोटा सा बाजार हुआ करता था। मेले की अवधि में ये बाजार जरूर गुलजार होता था। बिजली नहीं होने से पूरी व्यवस्था लैंप, लालटेन से चला करती थी। कच्चा रास्ता होने से थोड़ी सी बरसात में लोग कीचड़ से परेशान रहते थे। 7 दिन तक आसपास के लोग देवीधुरा में नाते-रिश्तेदारों अथवा परिचितों के साथ रहते थे।
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1976 में लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने मां बाराही मंदिर कमेटी का पहली बार गठन कराया। इससे पहले यहां चार खाम के लोग आपस में तय कर मेले की व्यवस्था किया करते थे। लमगड़िया ने चारों खामों से ताल्लुक रखने वाले चंपावत, अल्मोडा और नैनीताल जिले के लोगों को एक मंच में लाकर मंदिर के विकास की शून्य से शिखर तक की यात्रा शुरू की। मंदिर कमेटी के माध्यम से क्षेत्रीय विकास की भी रूपरेखा तय की जाने लगी। पहले यहां के खोलीखांड मैदान के अलावा कई स्थानों में मेले के दौरान झोड़ा, झुम्टा, चांचड़ी, न्यौली का स्वर सुनाई देता था। अब यहां रंगारंग कार्यक्रमों की धूम रहती है।
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पूर्व सीएम तिवारी का भी रहा है लगाव
देवीधुरा मेले के प्रति पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का काफी लगाव रहा है। लेकिन वे सीएम की हैसियत से यहां कभी नहीं आ पाए। अलबत्ता उद्योग मंत्री के रूप में वे 80 के दशक में यहां आए तथा बैरों के साथ वह सुर में सुर भी मिलाने लगे। उप्र के पर्यटन मंत्री रहते 1991 में हरक सिंह रावत, पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री पूरन शर्मा, पूर्व सिंचाई मंत्री जगदंबिका पाल, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रताप भैय्या, डूंगर सिंह बिष्ट के अलावा काबीना मंत्री यशपाल आर्य यहां मेले में आते रहे। सांसद के रूप में हरीश रावत प्रतिवर्ष यहां आते रहे।


पैदल जत्थे में आते थे कुमाऊं केसरी
कुमाऊं केसरी खुशी राम यहां मेले के दौरान हल्द्वानी से पैदल जत्थे में आते थे तथा एक सप्ताह तक उनका जन मिलन कार्यक्रम हुआ करता था। आज वह स्थान स्वर्गीय खुशी राम पंडाल के रूप में प्रसिद्ध हुआ। पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने यहां स्थायी पंडाल का निर्माण कराया गया है, जहां हर साल मेले के दौरान कलाकार न्यौली, चांचड़ी, भगनौला आदि पूर्वजों की विरासत को नई पीढ़ी के सामने परोसते आ रहे हैं।

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