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सिस्टम से जूझ रहा फौजी का परिवार
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 14 Jan 2016 10:16 PM IST
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1948 के वीरचक्र विजेता चंद्री चंद अब दुनिया में नहीं हैं, लेकिन 2007 में आखिरी सांस लेने से पहले तक वे इनाम की जमीन के लिए जिंदगीभर लड़ते रहे और बाद में उनके परिवार ने हर दरवाजे पर दस्तक दी, मगर वे अब तक सिस्टम की खामियों से जीत न सके। युद्ध के मैदान में दुश्मनों को धराशायी करने वाले इस बहादुर फौजी का परिवार इनाम की जमीन हासिल नहीं कर सका। इनाम में दी गई भूमि पर कब्जा सरकार अब तक नहीं दिला सकी।
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सरहद की हिफाजत करने वाली देश की फौज की शौर्य गाथाओं की लंबी दास्तान है, मगर बहादुर फौजियों से किए गए वादों के पूरा न होने के मामले भी काफी है। वीरचक्र विजेता स्वर्गीय चंद्री चंद को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1978 में 6 अन्य फौजियों के साथ 20 बीघा जमीन देने का एलान किया गया था, लेकिन 37 साल बाद भी यह एलान पूरा नहीं हो सका है। आमबाग निवासी सूबेदार चंद ने आजादी के चंद महीनों बाद 1948 में पाकिस्तान द्वारा कश्मीर से किए गए हमले में जबर्दस्त शौर्य दिखाया था। इस साहस के लिए पहले राष्ट्रपति डा.राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया था।
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चंद्री चंद को शौर्य पूर्ण कार्य के लिए खटीमा तहसील के बिल्हरी गांव में 20 बीघा जमीन इनाम में मिली। साथ ही भूमि के खाता खतौनी भी दिए गए, लेकिन दान में दी गई जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका। उनके पुत्र किशन चंद का कहना है कि जमीन न मिलने की वजह आवंटित सीलिंग की जमीन पर पहले से ही ताकतवर लोगों का कब्जा था। इनाम की जमीन पाने के लिए उन्होंने प्रशासनिक अफसरों से लेकर राष्ट्रपति तक से फरियाद की, मगर हर तरफ से मायूसी मिली।
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ठीक नहीं परिवार की माली हालत
उसूलों के साथ जीने वाले वीरचक्र विजेता चंद्री चंद जिंदगीभर तंग हाल में रहे, लेकिन सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। अब उनके बेटे किशन आमबाग में मामूली खेती के अलावा स्टेशन के पास भोजनालय के जरिए रोजी-रोटी चला रहे हैं। किशन का कहना है कि पिता की देश सेवा को देखते हुए आमबाग रोड, राजकीय पॉलीटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज आदि का नाम पिता की स्मृति में रखा जाना चाहिए।
वीरचक्र विजेता स्वर्गीय चंद्री चंद को खटीमा में दान में दी गई जमीन का मामला जून 2015 में मुख्यमंत्री हरीश रावत के टनकपुर दौरे में भी उठा था। सीएम ने ऐसे प्रकरणों के समाधान के लिए पहल की है। राज्य सरकार की भूमि में से कुछ हिस्सा पूर्व फौजियों को देने पर चर्चा हुई थी। वर्तमान स्थिति क्या है, इसका पता लगाया जाएगा।
-रिटायर्ड कर्नल वीएस थापा, जिला पूर्व सैनिक कल्याण अधिकारी, चंपावत।