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चंपावत वालों को पसंद नहीं खुशियों की सवारी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 27 Oct 2016 10:11 PM IST
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खुशियों की सवारी का नंबर 104
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। चंपावत जिले में गर्भवती महिलाओं के लिए खास सुविधा नहीं है। इसके चलते जच्चा-बच्चा की जिंदगी पर भी खतरे की तलवार लटकी रहती है। इस कारण गर्भवती महिलाओं को सुविधा देने, अस्पताल तक पहुंचाने और घर छोड़ने के लिए खुशियों की सवारी चलाई गई, मगर इस खुशियों की सवारी को भी चंपावत के लोग खास पसंद नहीं कर रहे हैं। इसके उपयोग करने वालों की तादात बढ़ नहीं रही है।
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चंपावत जिले में जून 2012 से शुरू खुशियों की सवारी योजना शुरू हुई। योजना के जिला समन्वयक गौरव पांडेय ने बताया कि इसके जरिए गर्भवती महिलाओं को वक्त पर अस्पताल पहुंच उचित इलाज मुमकिन हैं। चंपावत जिले में इस वक्त चार खुशियों की सवारी हैं। चंपावत, लोहाघाट, पाटी और टनकपुर में इस समय ये सेवाएं संचालित हैं, मगर इन सेवाओं का उपयोग करने वाले बहुत कम हैं।
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जिले में बीते साढ़े चार वर्ष में 11011 अस्पताल में प्रसव और करीब 3700 घरेलू प्रसव हैं, मगर खुशियों की सवारी का उपयोग मात्र 5153 गर्भवती महिलाओं ने ही किया। जो अस्पताल में प्रसव कराने का महज 46.79 प्रतिशत है। हालत यह है कि चंपावत में बीते सात दिन से खुशियों की सवारी में एक भी कॉल नहीं आई है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डा.आरके जोशी का कहना है कि लोग अस्पताल में रुकना नहीं चाहते हैं। इसके पीछे मुख्य वजह घरेलू है।
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उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डा.डीएल साह का कहना है कि प्रसूता और शिशु के जन्म के 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए खुशियों की सवारी के जरिए गर्भवती महिला को घर से अस्पताल लाने के लिए इतना वक्त रुकना जरूरी होता है, मगर यहां लोग इसका उपयोग कम कर रहे हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
वर्ष अस्पताल में प्रसव खुशियों की सवारी का उपयोग
2012 2828 1534
2013 2622 926
2014 2398 714
2015 2150 1277
2016 (सितंबर तक) 1013 702