कहां गया मेरे कलेजे का टुकड़ा: बेटे की मौत पर मां की पुकार, तेंदुए की सूचना देने के बावजूद नहीं चेता वन विभाग
दीपावली से पहले तेंदुए के हमले में किशोर हर्षित पुजारी की मौत से सुई पऊ के डुंगरी तोक में गम और गुस्सा है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक महीने से तेंदुए की सूचना के बावजूद प्रशासन और वन विभाग नहीं चेते।
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हर्षित पुजारी अब कभी नहीं लौटेगा। दीपावली पर्व से ठीक पहले तेंदुए के हमले में किशोर की मौत से सुई पऊ के डुंगरी तोक में गम और गुस्सा है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक महीने से तेंदुआ लगातार दिखाई देने की सूचना देने के बावजूद न तो प्रशासन चेता और ना ही वन विभाग। अब उसकी मौत के बाद सक्रियता के दावे किए जा रहे हैं।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि योगेश ओली के अनुसार क्षेत्र में करीब एक महीने से तेंदुआ सक्रिय था। लोग कई बार वन विभाग से पिंजरा लगाकर उसे पकड़ने की मांग कर चुके थे लेकिन उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई। बुधवार शाम मेला देखकर घर लौट रहे हर्षित को तेंदुए ने घर से चंद कदम पहले ही मार डाला।
ग्राम प्रधान सुई खैसकांडे त्रिभुवन तिवारी ने तेंदुए को आदमखोर घोषित कर मारने की मांग उठाई है। क्षेत्र पंचायत सदस्य हिमांशु ओली ने भी लोगों की सुरक्षा के लिए उसे जल्द पकड़ने की अपील की है।
घटना के बाद डीएम मनीष कुमार डुंगरी तोक पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया। बाद में डीएम और सीएमओ डॉ. देवेश चौहान लोहाघाट अस्पताल पहुंचे। जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद बोहरा ने भी देर रात अस्पताल पहुंचकर परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
मां पूछ रही, कहां गया मेरे कलेजे का टुकड़ा
हर्षित राजकीय इंटर कॉलेज सुई में सातवीं का छात्र था। हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के कारण वह गांव में सभी का चहेता था। बुधवार सुबह रोज की तरह स्कूल गया। छुट्टी के बाद घर लौटा और दोस्तों के साथ रायकोट का मेला देखने निकल पड़ा। घर के पास पहुंचकर उसने दोस्तों से कपड़े बदलकर दोबारा मेले में आने की बात कही लेकिन घात लगाए तेंदुए ने उसे दबोच लिया। ग्रामीण उसे उप जिला अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। तेंदुए ने पेट और जांघ को नोंच लिया था और गले पर दांतों के निशान थे।
दो बहनों का इकलौता भाई हर्षित अब परिवार में नहीं है। मजदूरी कर परिवार चलाने वाले पिता गंगा दत्त पुजारी और मां नीमा पुजारी का बुरा हाल है। मां बार-बार बेटे को याद कर कहती रही- कहां गया मेरे कलेजे का टुकड़ा। बृहस्पतिवार को रामेश्वर घाट पर हर्षित का अंतिम संस्कार किया गया।
हर्षित की मौत छोड़ गई सवाल...
-करीब एक महीने से तेंदुए की सक्रियता की सूचना मिलने के बाद भी पहले पिंजरा क्यों नहीं लगाया गया?
-ग्रामीणों की ओर से की गई शिकायतों और मांगों का विभाग ने क्या संज्ञान लिया?
-आबादी से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी की क्या व्यवस्था थी?
-लगातार तेंदुआ दिखने के बावजूद स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
-जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए क्या स्थायी कार्ययोजना बनाई गई?
तीन साल में सात लोगों की मौत, 53 घायल
चंपावत जिले में वर्ष 2023 से अब तक हुए मानव-वन्यजीव संघर्षों में सात लोगों ने अपनी जान गंवाई है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अब तक 53 लोग वन्यजीव संघर्षों में घायल हुए हैं। इनमें अधिकतर लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है। करीब दो साल में मंगोली और बाराकोट के ओखलंज में तेंदुए के हमले में तीन लोग मारे जा चुके हैं। वहीं रायकोट में एक बच्चे पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। संवाद
इन इलाकों में भी तेंदुए की दहशत
लोहाघाट में लंबे समय से छमनियां स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक, गलचौड़ा, पाटन, डोबाभागू आदि क्षेत्रों में लगातार तेंदुआ दिखाई दे रहा है जिससे लोग डरे-सहमे हुए हैं। तेंदुए के खौफ से लोगों का सुबह और शाम के वक्त घूमना भी कम हो रहा है। ऐसे में लोग सतर्कता बरत रहे हैं। करीब दो वर्ष पूर्व क्षेत्र में बाइक से जा रहे आईटीबीपी जवानों पर तेंदुए ने झपट्टा मारा था। इस हमले में जवान बाल-बाल बच गए। इस क्षेत्र में स्टेडियम, आईटीबीपी क्षेत्र और केवीके का कार्यालय भी स्थित है। अक्सर यहां तेंदुए की धमक रहती है।
एनएच से लगे मैदान में दिनदहाड़े तेंदुआ दिखा
चंपावत नगर के प्रवेश द्वार छतार में पेट्रोल पंप के पास एनएच से लगे मैदान में दिनदहाड़े तेंदुआ दिखाई दिया। स्थानीय लोगों ने उसका वीडियो बनाया। सभासद प्रेमा चिलकोटी ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने की मांग की है। लगातार तेंदुए की मौजूदगी से लोग सुबह-शाम घरों से निकलने में भी डर रहे हैं।
मौत के बाद मुआवजे का मरहम
डीएफओ डी पुरुषोत्तम ने पीड़ित परिवार को विभाग की ओर से 10 लाख रुपये का चेक सौंपा है। रेंजर रमेश चंद्र जोशी ने बताया कि घटनास्थल के आसपास छह ट्रैप कैमरे और एक लाइव कैमरा लगाया गया है। तेंदुए को पकड़ने के लिए दो पिंजरे लगाए गए हैं। क्षेत्र में लगातार निगरानी की जा रही है। विशेष वनकर्मियों की तैनाती के साथ ड्रोन से निगरानी और शाम की गश्त भी बढ़ाई गई है।
मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन और वन विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं। सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्र में तुरंत पिंजरा स्थापित कर दिया गया है। लगातार मॉनिटरिंग के लिए वन विभाग का विशेष स्टाफ तैनात किया गया है। इसके साथ ही तेंदुए की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए क्षेत्र में ट्रैप कैमरों और ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। -डी पुरुषोत्तम, डीएफओ, चंपावत