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Champawat News: गूम गरसाड़ी और कनारी गांव को मिला सर्वाधिक शिक्षक देने का गौरव
Mon, 04 Sep 2023 11:44 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 04 Sep 2023 11:44 PM IST
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चंपावत जिले का जीआईसी गरसाड़ी।
चंपावत। जिले के पाटी ब्लॉक के गूम गरसाड़ी और कनारी गांव को सर्वाधिक शिक्षक देने का गौरव हासिल है। वर्ष 1960 के दौरान जब ब्लॉक के लधियाघाटी क्षेत्र में शैक्षिक जागरूकता शून्य थी और दूर-दूर तक स्कूलों का नामोनिशान नहीं था। ऐसे में राजकीय प्राथमिक विद्यालय गरसाड़ी के पहले शिक्षक रहे प्रेमबल्लभ गहतोड़ी ने क्षेत्र में शिक्षा की अलख जलाने का बीड़ा उठाया। प्रेमबल्लभ और उसके बाद शिक्षक जगन्नाथ गहतोड़ी की ओर से क्षेत्र में शिक्षा की ऐसी अलख जलाई गई कि आज गूम गरसाड़ी और कनारी गांव के लगभग हर घर में एक शिक्षक है।
गहतोड़ी बंधुओं ने गरसाड़ी प्राथमिक स्कूल में जन सहयोग से वर्ष 1962 में गांधी जूनियर हाईस्कूल की स्थापना की थी। इस स्कूल के खुलने से कोलूड़ा, रमक, मंगललेक, बालातड़ी, भुमवाड़ी, तलाड़ी, वार्षी, रीठा, बिगराकोट, गूम, जोगा बसान, पारस बटोलिया, रिखोली, ढोलीगांव गरसाड़ी आदि गांवों के बच्चे पढ़ने के लिए आने लगे। गरसाड़ी जूनियर हाईस्कूल को वर्ष 1978 में राज्य सरकार ने अपने हाथ में लेकर इसे हाईस्कूल का दर्जा दिया और 14 वर्ष बाद 1992 में इसे राजकीय इंटर कॉलेज का दर्जा मिला।
पहले प्राइमरी शिक्षक बनने को दी प्राथमिकता
चंपावत। गूम गरसाड़ी से हाईस्कूल की शिक्षा लेने के बाद इस क्षेत्र के युवाओं ने बीटीसी कर प्राइमरी शिक्षक बनने को अपनी प्राथमिकता दी। शिक्षक प्रेम बल्लभ गहतोड़ी के अनुसार सक्षम लोगों ने बाहर जाकर उच्च शिक्षा लेने के बाद ऊंचे मुकाम में पहुंचाना शुरू कर दिया। यही वजह है कि गूम, गरसाड़ी एवं कनारी गांवों में 70 से 80 फीसदी लोग शिक्षक हैं। तमाम ऐसे परिवार हैं जिनके यहां तीन से चार तक शिक्षक हैं।
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भावी पीढ़ी को आदर्श नागरिक बनाने में लगे हैं शिक्षक सुरेश
चंपावत। जीआईसी के शिक्षक सुरेश आर्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उनमें चरित्र निर्माण और संस्कारों के बीज भी बो रहे हैं। वह बच्चों को शिक्षा के साथ हर क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में खड़ा करने के लिए लगातार प्रयासों में लगे रहते हैं। उनकी इसी लगन के कारण उन्हें शैलेश मटियानी शिक्षक दक्षता पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
शिक्षक नवीन जोशी दे रहे हैं बच्चों को निशुल्क शिक्षा
चंपावत। अमोड़ी के शिक्षक नवीन जोशी 20 बच्चों को निशुल्क ट्यूशन दे रहे हैं। सनातन सेवा संस्थान की ओर से संचालित निशुल्क बाल संस्कारशाला का संचालन किया जा रहा है। वह प्रत्येक रविवार को शाम चार बजे से संस्कारशाला का आयोजन कर बच्चों को भारतीय संस्कृति की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
शिक्षिका माधुरी और उर्मिला के प्रयासों से आगे बढ़ रहे बच्चे
चंपावत। राजकीय प्राथमिक स्कूल दुबचौड़ा किसी निजी स्कूल से कम नहीं है। यहां के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का स्तर और समझ बेहतरीन है। तारीफ के ये बोल क्षेत्र के लोग ही नहीं 30 अगस्त को स्कूल के निरीक्षण के लिए आए मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित के हैं। विद्यालय की इस चमक के पीछे हैं यहां की दो शिक्षिकाओं प्रभारी प्रधानाध्यापक माधुरी और शिक्षिका उर्मिला बिष्ट की तपस्या है।
सरल-सहज तरीके से पढ़ाने और आगे बढ़ाने के लिए नए-नए तरीके ईजाद करने वालीं दोनों शिक्षिकाएं अच्छे काम पर विद्यार्थियों को शाबासी और पुरस्कृत कर प्रेरित करती हैं। याद करने के लिए दोहराव, करके सीखो की पद्धति से पढ़ाने की आदत दोनों शिक्षिकाओं की खास खूबी है। हर विषय की दो (स्कूल और गृह कार्य) कॉपियां बनाकर सीखने की प्रक्रिया को बेहतर किया जा रहा है।
एसएमसी की अध्यक्ष रितू बिष्ट कहती हैं कि दोनों शिक्षिकाओं की मेहनत और प्रेरणा से अभिभावक भी बच्चों के काम और कमियों का नियमित रूप से मूल्यांकन कर सुधार करते हैं। जरूरत होने पर अतिरिक्त कक्षाओं से भी बच्चों की मदद की जाती है। इन सब प्रयासों का ही नतीजा है कि कम आबादी के बावजूद दुबचौड़ा में दो साल में विद्यार्थी संख्या 33 से बढ़कर 42 हो गई है।
आदर्श विद्यालय के आदर्श गुरु हैं मुकेश कर्नाटक
लोहाघाट (चंपावत)। पाटी ब्लॉक के पोखरी गांव के आदर्श राजकीय प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुकेश चंद्र कर्नाटक के पढ़ाने का तरीका कुछ ऐसा है कि विद्यालय में तीन साल में न केवल छात्र संख्या 58 से बढ़कर 78 हो गई बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता के चलते जवाहर नवोदय स्कूल में चयन होने वालों के विद्यार्थियों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। अब इस स्कूल से मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी योजना के अंतर्गत दो वर्ष में लगातार सात-सात विद्यार्थी चयनित हुए हैं।
विद्यालय और अपने विद्यार्थियों के प्रति लगाव के चलते शिक्षक कर्नाटक ने एलटी गणित के पद पर पदोन्नति को भी छोड़ दिया। सीईओ आरसी पुरोहित कहते हैं कि प्रधानाध्यापक कर्नाटक की सीख और समर्पण से छात्र ही नहीं बढ़े बल्कि बच्चों में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की स्वस्थ होड़ भी मचने लगी। वर्ष 2011 में पोखरी स्थानांतरण के बाद वर्ष 2016 में कर्नाटक को उत्कृष्ट शिक्षण कार्य के लिए गवर्नर टीचर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया। वैसे सरकारी शिक्षक बनने से पूर्व वर्ष 1998 से रीठाखाल, लोहाघाट के महर्षि विद्या मंदिर, केंद्रीय विद्यालय रोहिणी (दिल्ली) और बनबसा में गणित जैसे कठिन विषय को सरल तरीके से सिखाने वाले शिक्षक के रूप में मुकेश कर्नाटक पहचान रही।
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गहतोड़ी बंधुओं ने गरसाड़ी प्राथमिक स्कूल में जन सहयोग से वर्ष 1962 में गांधी जूनियर हाईस्कूल की स्थापना की थी। इस स्कूल के खुलने से कोलूड़ा, रमक, मंगललेक, बालातड़ी, भुमवाड़ी, तलाड़ी, वार्षी, रीठा, बिगराकोट, गूम, जोगा बसान, पारस बटोलिया, रिखोली, ढोलीगांव गरसाड़ी आदि गांवों के बच्चे पढ़ने के लिए आने लगे। गरसाड़ी जूनियर हाईस्कूल को वर्ष 1978 में राज्य सरकार ने अपने हाथ में लेकर इसे हाईस्कूल का दर्जा दिया और 14 वर्ष बाद 1992 में इसे राजकीय इंटर कॉलेज का दर्जा मिला।
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पहले प्राइमरी शिक्षक बनने को दी प्राथमिकता
चंपावत। गूम गरसाड़ी से हाईस्कूल की शिक्षा लेने के बाद इस क्षेत्र के युवाओं ने बीटीसी कर प्राइमरी शिक्षक बनने को अपनी प्राथमिकता दी। शिक्षक प्रेम बल्लभ गहतोड़ी के अनुसार सक्षम लोगों ने बाहर जाकर उच्च शिक्षा लेने के बाद ऊंचे मुकाम में पहुंचाना शुरू कर दिया। यही वजह है कि गूम, गरसाड़ी एवं कनारी गांवों में 70 से 80 फीसदी लोग शिक्षक हैं। तमाम ऐसे परिवार हैं जिनके यहां तीन से चार तक शिक्षक हैं।
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भावी पीढ़ी को आदर्श नागरिक बनाने में लगे हैं शिक्षक सुरेश
चंपावत। जीआईसी के शिक्षक सुरेश आर्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उनमें चरित्र निर्माण और संस्कारों के बीज भी बो रहे हैं। वह बच्चों को शिक्षा के साथ हर क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में खड़ा करने के लिए लगातार प्रयासों में लगे रहते हैं। उनकी इसी लगन के कारण उन्हें शैलेश मटियानी शिक्षक दक्षता पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
शिक्षक नवीन जोशी दे रहे हैं बच्चों को निशुल्क शिक्षा
चंपावत। अमोड़ी के शिक्षक नवीन जोशी 20 बच्चों को निशुल्क ट्यूशन दे रहे हैं। सनातन सेवा संस्थान की ओर से संचालित निशुल्क बाल संस्कारशाला का संचालन किया जा रहा है। वह प्रत्येक रविवार को शाम चार बजे से संस्कारशाला का आयोजन कर बच्चों को भारतीय संस्कृति की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
शिक्षिका माधुरी और उर्मिला के प्रयासों से आगे बढ़ रहे बच्चे
चंपावत। राजकीय प्राथमिक स्कूल दुबचौड़ा किसी निजी स्कूल से कम नहीं है। यहां के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का स्तर और समझ बेहतरीन है। तारीफ के ये बोल क्षेत्र के लोग ही नहीं 30 अगस्त को स्कूल के निरीक्षण के लिए आए मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित के हैं। विद्यालय की इस चमक के पीछे हैं यहां की दो शिक्षिकाओं प्रभारी प्रधानाध्यापक माधुरी और शिक्षिका उर्मिला बिष्ट की तपस्या है।
सरल-सहज तरीके से पढ़ाने और आगे बढ़ाने के लिए नए-नए तरीके ईजाद करने वालीं दोनों शिक्षिकाएं अच्छे काम पर विद्यार्थियों को शाबासी और पुरस्कृत कर प्रेरित करती हैं। याद करने के लिए दोहराव, करके सीखो की पद्धति से पढ़ाने की आदत दोनों शिक्षिकाओं की खास खूबी है। हर विषय की दो (स्कूल और गृह कार्य) कॉपियां बनाकर सीखने की प्रक्रिया को बेहतर किया जा रहा है।
एसएमसी की अध्यक्ष रितू बिष्ट कहती हैं कि दोनों शिक्षिकाओं की मेहनत और प्रेरणा से अभिभावक भी बच्चों के काम और कमियों का नियमित रूप से मूल्यांकन कर सुधार करते हैं। जरूरत होने पर अतिरिक्त कक्षाओं से भी बच्चों की मदद की जाती है। इन सब प्रयासों का ही नतीजा है कि कम आबादी के बावजूद दुबचौड़ा में दो साल में विद्यार्थी संख्या 33 से बढ़कर 42 हो गई है।
आदर्श विद्यालय के आदर्श गुरु हैं मुकेश कर्नाटक
लोहाघाट (चंपावत)। पाटी ब्लॉक के पोखरी गांव के आदर्श राजकीय प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुकेश चंद्र कर्नाटक के पढ़ाने का तरीका कुछ ऐसा है कि विद्यालय में तीन साल में न केवल छात्र संख्या 58 से बढ़कर 78 हो गई बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता के चलते जवाहर नवोदय स्कूल में चयन होने वालों के विद्यार्थियों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। अब इस स्कूल से मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी योजना के अंतर्गत दो वर्ष में लगातार सात-सात विद्यार्थी चयनित हुए हैं।
विद्यालय और अपने विद्यार्थियों के प्रति लगाव के चलते शिक्षक कर्नाटक ने एलटी गणित के पद पर पदोन्नति को भी छोड़ दिया। सीईओ आरसी पुरोहित कहते हैं कि प्रधानाध्यापक कर्नाटक की सीख और समर्पण से छात्र ही नहीं बढ़े बल्कि बच्चों में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की स्वस्थ होड़ भी मचने लगी। वर्ष 2011 में पोखरी स्थानांतरण के बाद वर्ष 2016 में कर्नाटक को उत्कृष्ट शिक्षण कार्य के लिए गवर्नर टीचर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया। वैसे सरकारी शिक्षक बनने से पूर्व वर्ष 1998 से रीठाखाल, लोहाघाट के महर्षि विद्या मंदिर, केंद्रीय विद्यालय रोहिणी (दिल्ली) और बनबसा में गणित जैसे कठिन विषय को सरल तरीके से सिखाने वाले शिक्षक के रूप में मुकेश कर्नाटक पहचान रही।