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ऐसे तो लग जाएगा अदरक की खेती पर ब्रेक

Tue, 17 May 2016 10:17 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत Updated Tue, 17 May 2016 10:17 PM IST
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So it will take a break on the cultivation of ginger
तैयार किए गए खेत। - फोटो : अमर उजाला

 सूखे की मार झेलने वाले किसानों के लिए अदरक की खेती एक उम्मीद थी और इसी उम्मीद पर उन्होंने अदरक लगाने के लिए खेत तैयार किए, लेकिन सरकारी बीज की कमी से ये भी नाउम्मीदी में बदल रही है। उन्हें जरूरत भर के लिए भी बीज नहीं मिल पा रहा है, मिल भी रहा है तो अधिक रकम खर्च करनी पड़ रही है।

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पहले तो उद्यान विभाग समय पर बीज उपलब्ध नहीं करा पाया और जब दस दिन पहले बीज आए भी, तो कम मात्रा में मिले। डिमांड 290 क्विंटल की थी, लेकिन मिला महज 116 क्विंटल। इस कारण किसानों को जरूरत के हिसाब से बीज नहीं मिल सके। विभागीय बीज 30 रुपये और बाजार का बीज 55 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से मिल रहा है। विभागीय बीज की प्रमाणिकता भी अधिक होती है। पिछले साल जिले को 300 क्विंटल बीज 35.40 रुपये की दर से मिला था। अदरक की फसल जिले की प्रमुख नकदी फसल है। करीब 304 हेक्टेयर क्षेत्र में अदरक की बुवाई होती है। पिछले साल 2349 क्विंटल अदरक का उत्पादन हुआ।
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बाजार में ढाई हजार रुपये महंगा है बीज
किसानों का कहना है कि पर्याप्त मात्रा में बीज नहीं मिलने से दिक्कत आ रही है। किसानों ने उद्यान विभाग के बीज का इंतजार किया। मजबूर होकर बाजार से बीज खरीदा, मगर यह बीज विभागीय बीज से करीब 2500 रुपये क्विंटल अधिक कीमत का है। 15 अप्रैल से करीब एक माह तक बुवाई का उपयुक्त समय होता है।
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तो तोड़ लेंगे अदरक की खेती से नाता
किसान ध्यान सिंह, गौरी दत्त, गिरधारी, हेतराम आदि का कहना है कि अदरक की फसल इलाके की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाती थी। घर-गृहस्थी का खर्चा इससे निकल जाता था। सूखे के बाद अब वक्त पर बीज नहीं मिलने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिरा है। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो वे अदरक की खेती से नाता तोड़ने को मजबूर होंगे।


चंपावत जिले के लिए 290 क्विंटल अदरक के बीज की मांग की गई थी, मगर इसके सापेक्ष जिले में मात्र 40 प्रतिशत बीज ही मिल सके हैं। इस बीज को पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर बांटा गया, लेकिन कम बीज के चलते एक किसान को अधिकतम 20 किलोग्राम बीज ही दिया गया। - हरीश तिवारी, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।

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