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खर्राटाक के जंगल में शिकारियों का डेरा
राजेश देउपा/ टनकपुर (चंपावत)
Updated Sat, 18 Jun 2016 10:12 PM IST
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खर्राटाक के जंगल में शिकारियों का डेरा
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत वन प्रभाग के बूम रेंज के खर्राटाक जंगल में एक बार फिर वन्यजीव शिकारियों के डेरा जमाने के प्रमाण मिले हैं। खर्राटाक में हर साल सीमा पार के शिकारियों का डेरा रहता है, लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं। एक सप्ताह पहले खर्राटाक के कालसन मंदिर में पूजा के लिए गए लोगों को जंगल में वन्यजीवों के शिकार के पुख्ता प्रमाण मिले हैं, जिन्हें उन्होंने कैमरे में कैद कर नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर अमर उजाला को फोटोग्राफ उपलब्ध कराए हैं।
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वाइल्ड लाइफ की बैठक हो या फिर भारत-नेपाल के सीमांत जिलों के अफसरों की बैठक, हर बार वन्यजीवों की तस्करी पर अंकुश लगाने का दम भरा जाता रहा है, लेकिन चंपावत वन प्रभाग के जंगलों में वर्षों से धड़ल्ले से हो रहे वन्यजीवों के शिकार को रोक पाने में न तो वन विभाग और न ही भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी सफल हो पाई है। खर्राटाक का जंगल भारत-नेपाल सीमा से लगा है, जहां हर साल शिकारी डेरा जमाकर बेखौफ वन्यजीवों का शिकार करते हैं। पांच साल पहले भी सूचना मिलने पर अमर उजाला की टीम ने वहां जाकर वन्यजीवों के शिकार के साक्ष्य जुटाए थे। खबर छपने पर तब वन विभाग, पुलिस प्रशासन और एसएसबी ने ज्वाइंट कांबिंग कर शिकारियों को खदेड़ा था।
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बता दें कि पड़ोसी देश नेपाल के शिकारी ट्यूब के सहारे शारदा नदी पार कर खर्राटाक के जंगल में प्रवेश करते हैं। रात में वन्यजीवों का शिकार कर गांव के वीरान पड़े मकानों में डेरा डालकर अंधेरा छंटने से पहले ही नेपाल लौट जाते हैं। जंगल में कई जगह बने मचान शिकारियों की सक्रियता को पुख्ता करते हैं। मचानों के आसपास शिकार किए गए वन्यजीव के मांस को सुखाकर सुक्टी (सूखा मांस) बनाई जाती है, जिसे फिर ऊंचे दामों पर (चार सौ से पांच सौ रुपये किग्रा) बेचा जाता है। फोटोग्राफ में मांस को सुखाने के लिए बनाए गए लकड़ी के मचान एवं नीचे लगे चूल्हे और वहां पड़ी एक वन्यजीव की खाल से साफ है कि शिकारियों का गिरोह अब भी खर्राटाक के जंगल में सक्रिय है।
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2014 में शिकारियों से मुठभेड़ में बरामद हुई थी दो बंदूक
खर्राटाक के जंगल में वन विभाग, एसएसबी, खुफिया तंत्र और पुलिस टीम की 2014 में शिकारी गिरोह के साथ मुठभेड़ हुई थी, तब शिकारी अपनी बंदूकेें छोड़ शारदा पार कर नेपाल को भाग निकले थे। मौके से शिकारियों की दो बंदूक बरामद हुई थी।
एसएसबी की सतर्कता पर सवाल
खर्राटाक से लगी नेपाल सीमा पर कदम-कदम पर एसएसबी की बीओपी होने के बाद भी सीमा पार से शिकारी गिरोह की घुसपैठ एसएसबी की चौकसी पर भी सवाल खड़े कर रही है। नेपाल सीमा से लगे खर्राटाक के 17 किमी सीमा पर एसएसबी की श्रीकुंड, कलढुंगा प्रथम, कलढुंगा द्वितीय, चूका, सीम, खेत में आधा दर्जन बीओपी है, ऐसे में सीमा पार से शिकारियों की घुसपैठ से एसएसबी सतर्कता भी संदेह के दायरे में है।
एसएसबी और पुलिस के साथ की जाएगी कांबिंग
बूम रेंज के खर्राटाक जंगल में शिकारियों के होने की सूचना मिली है। विभाग की टीम को गश्त पर भेजा गया है। पुलिस और एसएसबी के साथ वन विभाग की टीम को कांबिंग में भेजने की तैयारी की जा रही है। -एके गुप्ता, प्रभागीय वनाधिकारी चंपावत।