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आतिशबाजी बाजार में दूसरे दिन भी पसरा रहा सन्नाटा
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Wed, 18 Oct 2017 09:32 PM IST
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चंपावत गोरलचौड़ मैदान में लगे पटाखा बाजार से आतिशबाजी खरीदते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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जिला मुख्यालय में दीवाली के लिए लगाए गए आतिशबाजी बाजार में दूसरे दिन भी सन्नाटा पसरा रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के दृष्टिगत पटाखा बाजार गोरलचौड़ मैदान में लगाने का निर्णय लिया गया है। जिसके तहत प्रशासन ने 31 व्यापारियों को अस्थायी लाइसेंस जारी किए गए हैं। लेकिन आतिशबाजी बाजार से ग्राहक गायब हैं। जिन दुकानदारों ने काफी उम्मीद में दुकानें सजाई थीं उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। व्यापारियों का कहना था कि प्रशासन ने गलत निर्णय लेकर पटाखा बाजार को मुख्य बाजार से काफी दूर कर दिया है। जिस कारण ग्राहक पटाखा बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। व्यापारी प्रकाश गिरि का कहना है कि इस बार गत वर्ष की तुलना में आतिशबाजी बाजार में पचास फीसदी की कमी आई है। अलबत्ता चतुर्दशी पर बुधवार को जिला मुख्यालय के बाजार में चहल पहल रही। दीपावली पर्व को लेकर लोगों ने जमकर खरीददारी की। बाहर से आए व्यापारियों ने तमाम तरह की दुकानें लगाई हुई थी। शहर के अलावा चाराल क्षेत्र के ग्रामीणों ने खरीददारी की।
खीले और बताशे की खरीद में भी आई कमी
चंपावत। दीपावली पर्व पर खीले बताशे भी बिके। पीलीभीत, खटीमा, टनकपुर से आए राकेश, मनोहर आदि व्यापारियों ने खील और बताशे की दुकानें सजाई हुई थी। हालांकि बदलते जमाने के साथ ही खीले बताशे की बिक्री पर कमी आई है। बावजूद इसके लक्ष्मी पूजन के लिए लोग खीले बताशे खरीदते हुए दिखाई दिए।
मिट्टी से बनी मूर्तियों की रही काफी मांग
चंपावत। दीपावली में मिट्टी से बनी मूर्तियों की भी काफी मांग रही। पिछले चार सालों से यहां मिट्टी की मूर्तियों को बेचने वाले किशोरी लाल ने बताया कि वे इन मूर्तियों को आगरा से लेकर आए हैं। इन मूर्तियों की कीमत 20 रुपये से 60 रुपये तक है। किशोरी लाल ने बताया कि इन मूर्तियों में गणेश, शिवजी, विष्णु समेत तमाम देवी देवताओं की मूर्ति हैं। लेकिन दीपावली में सबसे अधिक मांग लक्ष्मी की मूर्ति की है।
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बाजार में कलेेंडरों और रंगबिरंगी मालाओं की धूम
चंपावत। जिला मुख्यालय का बाजार तमाम तरह के कलेंडरों और रंगबिरंगी मालाओं से पटा हुआ है। फैंसी रंगबिरंगी मालाएं लोगों ने खासी पसंद की। अदिति कास्मेटिक के हरीश सक्टा ने बताया कि इन मालाओं की कीमत दस रुपये से दो सौ रुपये तक है। इसके अलावा फिल्मी कलाकारों से लेकर तमाम देवी देवताओं की फोटो लगे कलेंडरों की बिक्री भी हुई। खिलाड़ियों और फिल्मी कलाकारों के कैलेंडर को युवाओं ने खासा पसंद किया।
लक्ष्मी पूजन के लिए गन्ने की भी हुई बिक्री
चंपावत। दीवाली पर्व पर लक्ष्मी पूजन के लिए गन्ने की भी खूब बिक्री हो रही है। स्थानीय स्तर पर उत्पादित गन्ने के अलावा मैदानी क्षेत्र से भी बिक्री के लिए गन्ना लाया गया। गन्ने की एक पौध बीस रुपये में बिकी।
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खीले और बताशे की खरीद में भी आई कमी
चंपावत। दीपावली पर्व पर खीले बताशे भी बिके। पीलीभीत, खटीमा, टनकपुर से आए राकेश, मनोहर आदि व्यापारियों ने खील और बताशे की दुकानें सजाई हुई थी। हालांकि बदलते जमाने के साथ ही खीले बताशे की बिक्री पर कमी आई है। बावजूद इसके लक्ष्मी पूजन के लिए लोग खीले बताशे खरीदते हुए दिखाई दिए।
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मिट्टी से बनी मूर्तियों की रही काफी मांग
चंपावत। दीपावली में मिट्टी से बनी मूर्तियों की भी काफी मांग रही। पिछले चार सालों से यहां मिट्टी की मूर्तियों को बेचने वाले किशोरी लाल ने बताया कि वे इन मूर्तियों को आगरा से लेकर आए हैं। इन मूर्तियों की कीमत 20 रुपये से 60 रुपये तक है। किशोरी लाल ने बताया कि इन मूर्तियों में गणेश, शिवजी, विष्णु समेत तमाम देवी देवताओं की मूर्ति हैं। लेकिन दीपावली में सबसे अधिक मांग लक्ष्मी की मूर्ति की है।
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बाजार में कलेेंडरों और रंगबिरंगी मालाओं की धूम
चंपावत। जिला मुख्यालय का बाजार तमाम तरह के कलेंडरों और रंगबिरंगी मालाओं से पटा हुआ है। फैंसी रंगबिरंगी मालाएं लोगों ने खासी पसंद की। अदिति कास्मेटिक के हरीश सक्टा ने बताया कि इन मालाओं की कीमत दस रुपये से दो सौ रुपये तक है। इसके अलावा फिल्मी कलाकारों से लेकर तमाम देवी देवताओं की फोटो लगे कलेंडरों की बिक्री भी हुई। खिलाड़ियों और फिल्मी कलाकारों के कैलेंडर को युवाओं ने खासा पसंद किया।
लक्ष्मी पूजन के लिए गन्ने की भी हुई बिक्री
चंपावत। दीवाली पर्व पर लक्ष्मी पूजन के लिए गन्ने की भी खूब बिक्री हो रही है। स्थानीय स्तर पर उत्पादित गन्ने के अलावा मैदानी क्षेत्र से भी बिक्री के लिए गन्ना लाया गया। गन्ने की एक पौध बीस रुपये में बिकी।
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