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मंजूरी के आठ साल बाद भी शुरू नहीं रोड का काम
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दिनेश बोहरा।
- फोटो : CHAMPAWAT
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आठ साल पूर्व मंजूर मंच-बकोड़ा सड़क में आज तक काम शुरू नहीं हो सका है। सड़क न होने से ग्रामीणों को समस्या हो रही है। वन अनापत्ति नहीं मिलने से काम आगे नहीं बढ़ सका है। जबकि सड़क की मांग को लेकर लोकसभा चुनाव में मतदान बहिष्कार हुआ था। 597 में से महज 19 लोगों ने वोट डाला था।
नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के सात गांव के लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए चार से 12 किमी तक पैदल दूरी तय करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि 2011 में मंजूर सड़क में आज तक काम शुरू नहीं होने से यहां के लोगों को इलाज के लिए डोली का आसरा लेना पड़ता है। वहीं लोनिवि के अधिशासी अभियंता डीडी भट्ट का कहना है कि विभाग की ओर से वन अनापत्ति 2015 में भेजी जा चुकी थी। अभी ये पत्रावली नोडल कार्यालय देहरादून में लंबित है।
रोड की कमी से डेरी व खेती का काम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। सड़क में काम शुरू करने के लिए तहसील दिवस सहित कई मंचों पर आवाज उठा चुके हैं। हीरा सिंह।
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सड़क न होने से महिलाओं और छात्राओं को सबसे ज्यादा समस्या हो रही है। बुनियादी सुविधाओं के अलावा छात्राओं को स्कूल भेजने के लिए भी यह सड़क जरूरी है। जानकी महर।
मंच-बकोड़ा रोड बनने का लाभ कई गांवों को मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र की खेती और अन्य आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगीं। रंजना देवी।
कोट
पड़ोस में नेपाल के गांवों में काफी पहले सड़क पहुंच गई है। जबकि उत्तराखंड बनने के 19 साल बाद भी यह पिछड़ा इलाका सड़क को तरस रहा है। दिनेश बोहरा।
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नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के सात गांव के लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए चार से 12 किमी तक पैदल दूरी तय करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि 2011 में मंजूर सड़क में आज तक काम शुरू नहीं होने से यहां के लोगों को इलाज के लिए डोली का आसरा लेना पड़ता है। वहीं लोनिवि के अधिशासी अभियंता डीडी भट्ट का कहना है कि विभाग की ओर से वन अनापत्ति 2015 में भेजी जा चुकी थी। अभी ये पत्रावली नोडल कार्यालय देहरादून में लंबित है।
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रोड की कमी से डेरी व खेती का काम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। सड़क में काम शुरू करने के लिए तहसील दिवस सहित कई मंचों पर आवाज उठा चुके हैं। हीरा सिंह।
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सड़क न होने से महिलाओं और छात्राओं को सबसे ज्यादा समस्या हो रही है। बुनियादी सुविधाओं के अलावा छात्राओं को स्कूल भेजने के लिए भी यह सड़क जरूरी है। जानकी महर।
मंच-बकोड़ा रोड बनने का लाभ कई गांवों को मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र की खेती और अन्य आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगीं। रंजना देवी।
कोट
पड़ोस में नेपाल के गांवों में काफी पहले सड़क पहुंच गई है। जबकि उत्तराखंड बनने के 19 साल बाद भी यह पिछड़ा इलाका सड़क को तरस रहा है। दिनेश बोहरा।

रंजना देवी।- फोटो : CHAMPAWAT

हीरा सिंह।- फोटो : CHAMPAWAT

मंच-बकोड़ा रोड में काम शुरू न होने से इस तरह से मरीज को डोली में लाना पड़ता है। (फाइल फोटो)- फोटो : CHAMPAWAT