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बीमार बालिका को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Wed, 22 Feb 2017 09:30 PM IST
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बीमार बालिका को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल में बुधवार को एक बार फिर से डॉक्टरों का अमानवीय चेहरा सामने आया, जब उन्होंने गंभीर रूप से रीढ़ की हड्डी की बीमारी से जूझ रही एक बालिका को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार कर दिया। इस पर व्यापार संघ अध्यक्ष अमरनाथ सक्टा और भाजपा नेता मोहन सिंह अधिकारी ने अस्पताल में हंगामा किया। उनके हस्तक्षेप के बाद बालिका को अस्पताल में भर्ती किया गया।
बुधवार को प्रस्तावित आपदा के मॉकड्रिल की तैयारियों में जिला अस्पताल प्रशासन भी मुस्तैदी से जुटा था। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम जहां आपदा के घायलों का इंतजार कर रही थी, ठीक उसी समय सीमांत कफल्टा की मरीज आनंदी अपने परिजनों के साथ जिला अस्पताल पहुंची।
डॉक्टरों ने आनंदी की गंभीर स्थिति को नजरअंदाज करते हुए उसे भर्ती करने के बजाए हायर सेंटर रेफर करने की बात कही। इस पर परिजनों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी दी। मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने इस मामले को लेकर डॉक्टरों को खूब खरी-खोटी सुनाई तथा रीढ़ की हड्डी की बीमारी से जूझ रही आनंदी को तत्काल भर्ती करने का दबाव बनाया। हंगामा बढ़ता देख डॉक्टरों ने आनंदी को अस्पताल में भर्ती किया।
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उधर, अस्पताल प्रबंधन की ओर से सफाई दी गई कि आनंदी को भर्ती करने से इनकार नहीं किया गया था, बल्कि मॉकड्रिल निपटने तक इंतजार करने को कहा गया था। व्यापार संघ अध्यक्ष का कहना था कि जिला अस्पताल में लगातार लापरवाही के मामले प्रकाश में आते रहे हैं, यहां आने वाले मरीजों को भर्ती करने के बजाए जल्द से जल्द टरकाने का प्रयास किया जाता है।
बुधवार को प्रस्तावित आपदा के मॉकड्रिल की तैयारियों में जिला अस्पताल प्रशासन भी मुस्तैदी से जुटा था। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम जहां आपदा के घायलों का इंतजार कर रही थी, ठीक उसी समय सीमांत कफल्टा की मरीज आनंदी अपने परिजनों के साथ जिला अस्पताल पहुंची।
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डॉक्टरों ने आनंदी की गंभीर स्थिति को नजरअंदाज करते हुए उसे भर्ती करने के बजाए हायर सेंटर रेफर करने की बात कही। इस पर परिजनों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी दी। मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने इस मामले को लेकर डॉक्टरों को खूब खरी-खोटी सुनाई तथा रीढ़ की हड्डी की बीमारी से जूझ रही आनंदी को तत्काल भर्ती करने का दबाव बनाया। हंगामा बढ़ता देख डॉक्टरों ने आनंदी को अस्पताल में भर्ती किया।
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उधर, अस्पताल प्रबंधन की ओर से सफाई दी गई कि आनंदी को भर्ती करने से इनकार नहीं किया गया था, बल्कि मॉकड्रिल निपटने तक इंतजार करने को कहा गया था। व्यापार संघ अध्यक्ष का कहना था कि जिला अस्पताल में लगातार लापरवाही के मामले प्रकाश में आते रहे हैं, यहां आने वाले मरीजों को भर्ती करने के बजाए जल्द से जल्द टरकाने का प्रयास किया जाता है।