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ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बन रही कच्ची रोड
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Fri, 22 Jan 2016 10:42 PM IST
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राज्य बनने के बाद सड़क निर्माण की गति में तेजी तो आई, मगर कई गांवों के लोगों के लिए रोड अब भी सपना बनी है। इससे भी खराब स्थिति यह कि निर्मित मोटर मार्गों में भी कच्ची रोड बहुतायत में है। ज्यादातर डामर रहित रोड ग्रामीण क्षेत्रों की हैं। ऐसी रोड ग्रामीणों से लेकर आवाजाही करने वालों तक के लिए सिरदर्द बन रही है।
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चंपावत जिले में करीब 797 किलोमीटर लंबा मोटर मार्ग है, इसमें करीब 200 किमी मार्ग ग्रामीण क्षेत्रों का है। गांवों को जाने वाले अधिकांश मोटर मार्ग तो कच्चे है ही, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से निर्मित कई मोटर मार्ग भी पक्की नहीं है। जिला मुख्यालय के पास की चंपावत-खर्ककार्की-मुड़ियानी मार्ग तो तीन वर्ष बाद भी डामर का इंतजार कर रही है। बिरगुल-गोली, चंपावत रिंग रोड सहित ऐसी कई दूसरी सड़कें हैं, जो पक्की सड़क नहीं हो सकी है। लोक निर्माण विभाग के अभियंता अनुपम राय का कहना है कि इन रोडों को पक्का करने की तैयारी चल रही है।
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परेशानी भी और जेब पर मार भी
जिले में कच्ची रोड से वाहनों की आवाजाही तो हो रही है, लेकिन परेशानी कम नहीं है। श्याम नारायण पांडेय, मोहन सिंह अधिकारी, गोविंद सामंत का कहना है कि कच्ची रोडों के डामरीकृत हुए बगैर लोगों को समुचित लाभ नहीं मिल सकेगा। कच्ची रोड से ग्रामीणों को आवाजाही में अधिक समय लगने के अलावा जेब पर भी अधिक मार पड़ रही है। तेल में अधिक खपत और वाहनों की मरम्मत का खर्च सो अलग। बरसातों में इन रोडों पर चलना न केवल चुनौतीपूर्ण होता है, बल्कि हादसों को भी न्यौता देता है। नागरिकों का कहना है कि कच्ची रोड को न्यूनतम समय पर डामरीकृत किया जाना चाहिए। इससे आवाजाही में सुविधा के साथ ही रोड का टिकाऊपन भी बेहतर हो सकेगा।
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