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खरीद केंद्र खुले, लेकिन बेचने वाले नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Fri, 07 Apr 2017 09:17 PM IST
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खरीद केंद्र खुले, लेकिन बेचने वाले नहीं
- फोटो : अमर उजाला
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चार वर्ष बीत गए, मगर एक भी दाने गेहूं की सरकारी खरीद इस जिले में नहीं हो सकी, जबकि हर साल जिले में दो जगहों में गेहूं खरीद केंद्र बनते हैं। इस बार भी एक सप्ताह बीतने के बाद टनकपुर और बनबसा सरकारी क्रय केंद्र में किसान गेहूं बिक्री के लिए नहीं लाए हैं।
सहकारिता विभाग ने गेहूं की खरीद के लिए पहली अप्रैल से गेहूं क्रय केंद्र खोला है। इस बार गेहूं का दाम पिछले साल की अपेक्षा 100 रुपये ज्यादा 1625 रुपये क्विंटल रखा गया है। इसके बावजूद किसान गेहूं क्रय केंद्रों में ला रहे हैं। सहकारिता विभाग के जिला सहायक निबंधक पान सिंह राणा का कहना है कि ये केंद्र पहली अप्रैल से जून तक खुले रहेंगे। इन केंद्रों को खोलने से लेकर कर्मियों की तैनाती पर ही हजारों रुपए खर्च होते हैं। मगर गेहूं की बिक्री के लिए एक सप्ताह तक एक भी काश्तकार नहीं पहुंचा।
ये तस्वीर पहली बार भी नहीं है। 2014 से चंपावत जिले में एक भी दाना गेहूं नहीं खरीदा जा सका। हर बार क्रय केंद्र खोले जाते हैं, और फिर करीब तीन माह बाद उन्हें समेट दिया जाता है। इस कवायद में सरकारी पैसे की बर्बादी जरूर होती है। उधर सहायक निबंधक राणा का कहना है कि गेहूं खरीद के जिले में टनकपुर और बनबसा में केंद्र खोले गए हैं। लेकिन अभी तक किसानों द्वारा गेहूं बिक्री के लिए नहीं लाया गया है। किसानों को गेहूं बिक्री के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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जिले के पहाड़ी हिस्से से ज्यादा मैदानी क्षत्र टनकपुर-बनबसा में गेहूं की पैदावार होती है। जिले में पिछले साल करीब 8000 हेक्टेयर एरिया में फसल बोई गई थी। जिसमें करीब 9500 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ। इसमें से दो-तिहाई से ज्यादा पैदावार मैदान में हुई।
वर्ष खरीद (क्विंटल) दाम (रुपये प्रति क्विंटल)
2012 3173 1285
2013 710 1350
2014 000 1400
2015 000 1450
2016 000 1525
2017 अब तक 000 1625
सहकारिता विभाग ने गेहूं की खरीद के लिए पहली अप्रैल से गेहूं क्रय केंद्र खोला है। इस बार गेहूं का दाम पिछले साल की अपेक्षा 100 रुपये ज्यादा 1625 रुपये क्विंटल रखा गया है। इसके बावजूद किसान गेहूं क्रय केंद्रों में ला रहे हैं। सहकारिता विभाग के जिला सहायक निबंधक पान सिंह राणा का कहना है कि ये केंद्र पहली अप्रैल से जून तक खुले रहेंगे। इन केंद्रों को खोलने से लेकर कर्मियों की तैनाती पर ही हजारों रुपए खर्च होते हैं। मगर गेहूं की बिक्री के लिए एक सप्ताह तक एक भी काश्तकार नहीं पहुंचा।
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ये तस्वीर पहली बार भी नहीं है। 2014 से चंपावत जिले में एक भी दाना गेहूं नहीं खरीदा जा सका। हर बार क्रय केंद्र खोले जाते हैं, और फिर करीब तीन माह बाद उन्हें समेट दिया जाता है। इस कवायद में सरकारी पैसे की बर्बादी जरूर होती है। उधर सहायक निबंधक राणा का कहना है कि गेहूं खरीद के जिले में टनकपुर और बनबसा में केंद्र खोले गए हैं। लेकिन अभी तक किसानों द्वारा गेहूं बिक्री के लिए नहीं लाया गया है। किसानों को गेहूं बिक्री के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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जिले के पहाड़ी हिस्से से ज्यादा मैदानी क्षत्र टनकपुर-बनबसा में गेहूं की पैदावार होती है। जिले में पिछले साल करीब 8000 हेक्टेयर एरिया में फसल बोई गई थी। जिसमें करीब 9500 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ। इसमें से दो-तिहाई से ज्यादा पैदावार मैदान में हुई।
वर्ष खरीद (क्विंटल) दाम (रुपये प्रति क्विंटल)
2012 3173 1285
2013 710 1350
2014 000 1400
2015 000 1450
2016 000 1525
2017 अब तक 000 1625