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चार माह में भी नहीं खुली पोर्टेबल एक्सरे मशीन की पन्नी
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चंपावत जिला अस्पताल में चार महीने से बंद पड़ी पोर्टेबल एक्सरे मशीन। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। जिला अस्पताल में मरीज पोर्टेबल एक्सरे मशीन शुरू होने का इंतजार हो रहा है लेकिन शुरू होना तो दूर, इसकी पन्नी तक अभी नहीं खुल सकी। इंजीनियर के न आने से चंपावत जिले की पहली पोर्टेबल एक्सरे मशीन का उपयोग भारी हो रहा है। इस कारण इस मशीन को इंस्टॉल ही नहीं किया जा सका है। इस कारण चलने-फिरने में अक्षम मरीज इस मशीन का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
जिला अस्पताल में इस साल 30 जून को हंस फाउंडेशन की ओर से पोर्टेबल एक्सरे मशीन आई लेकिन तीन महीने बाद भी इस मशीन से परीक्षण शुरू नहीं हो सके हैं। इसकी वजह मशीन को इंस्टॉल करने के लिए इंजीनियरों की उपलब्धता न हो पाना है। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी ने बताया कि इंजीनियरों के न आने से अभी मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। उम्मीद है कि इस माह इंजीनियरों के आने से लेकर बिजली संबंधी दिक्कत दूर कर ली जाएगी।
पोर्टेबल एक्सरे मशीन का इस्तेमाल ऐसी हालत में किया जाता है, जब अस्पताल में भर्ती मरीज बिस्तर से उठकर एक्सरे कक्ष तक नहीं जा सकता। इस मशीन से सबसे बड़ी राहत चलने फिरने में अक्षम, गंभीर और अस्पताल में भर्ती मरीजों को होगी। यह पोर्टेबल एक्सरे मशीन मरीज के बिस्तर के पास जाकर एक्सरे लेगी। एक्सरे से शरीर के भीतर की तस्वीर निकाल हड्डी, छाती, गठिया, रक्त वाहिकाओं में रुकावट सहित कई बीमारियों के निदान, निगरानी और इलाज में मदद मिलती है।
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टनकपुर में पौने तीन साल से संचालित नहीं हो रहे एक्सरे
चंपावत। जिले में 50 प्रतिशत एक्सरे मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। चार सरकारी अस्पतालों में एक्सरे मशीन हैं, लेकिन परीक्षण की सुविधा सिर्फ दो अस्पतालों में हैं। जिला अस्पताल के अलावा लोहाघाट उप जिला अस्पताल में ही परीक्षण हो रहे हैं। टनकपुर उप जिला अस्पताल में तकनीशियन न होने से जनवरी 2019 से एक्सरे नहीं हो रहे हैं। इसी तरह पाटी पीएचसी में भी एक्सरे परीक्षण नहीं हो रहे हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेज तकनीशियन की तैनाती का आग्रह किया गया है।
पोर्टेबल एक्सरे मशीन को इंस्टॉल करने के लिए इंजीनियरों की मांग कई बार की जा चुकी है लेकिन अभी इसमें देरी हो रही है। इस कारण इसे इंस्टॉल नहीं किया जा सका है। इसे जल्द से जल्द इंस्टॉल करवाने के लिए अनुस्मारक पत्र भेजे जा रहे हैं।
- डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
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जिला अस्पताल में इस साल 30 जून को हंस फाउंडेशन की ओर से पोर्टेबल एक्सरे मशीन आई लेकिन तीन महीने बाद भी इस मशीन से परीक्षण शुरू नहीं हो सके हैं। इसकी वजह मशीन को इंस्टॉल करने के लिए इंजीनियरों की उपलब्धता न हो पाना है। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी ने बताया कि इंजीनियरों के न आने से अभी मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। उम्मीद है कि इस माह इंजीनियरों के आने से लेकर बिजली संबंधी दिक्कत दूर कर ली जाएगी।
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पोर्टेबल एक्सरे मशीन का इस्तेमाल ऐसी हालत में किया जाता है, जब अस्पताल में भर्ती मरीज बिस्तर से उठकर एक्सरे कक्ष तक नहीं जा सकता। इस मशीन से सबसे बड़ी राहत चलने फिरने में अक्षम, गंभीर और अस्पताल में भर्ती मरीजों को होगी। यह पोर्टेबल एक्सरे मशीन मरीज के बिस्तर के पास जाकर एक्सरे लेगी। एक्सरे से शरीर के भीतर की तस्वीर निकाल हड्डी, छाती, गठिया, रक्त वाहिकाओं में रुकावट सहित कई बीमारियों के निदान, निगरानी और इलाज में मदद मिलती है।
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चंपावत। जिले में 50 प्रतिशत एक्सरे मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। चार सरकारी अस्पतालों में एक्सरे मशीन हैं, लेकिन परीक्षण की सुविधा सिर्फ दो अस्पतालों में हैं। जिला अस्पताल के अलावा लोहाघाट उप जिला अस्पताल में ही परीक्षण हो रहे हैं। टनकपुर उप जिला अस्पताल में तकनीशियन न होने से जनवरी 2019 से एक्सरे नहीं हो रहे हैं। इसी तरह पाटी पीएचसी में भी एक्सरे परीक्षण नहीं हो रहे हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेज तकनीशियन की तैनाती का आग्रह किया गया है।
पोर्टेबल एक्सरे मशीन को इंस्टॉल करने के लिए इंजीनियरों की मांग कई बार की जा चुकी है लेकिन अभी इसमें देरी हो रही है। इस कारण इसे इंस्टॉल नहीं किया जा सका है। इसे जल्द से जल्द इंस्टॉल करवाने के लिए अनुस्मारक पत्र भेजे जा रहे हैं।
- डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।