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मंजूर नहीं शिक्षकों की संबद्धता, धरने पर डटे ग्रामीणों की दो टूक
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चंपावत जिले के भिंगराड़ा में प्रधानाचार्य और शिक्षकों की तैनाती को लेकर धरने में बैठे अभिभावक।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। जीआईसी भिंगराड़ा में शिक्षकों के पदों को भरने के बजाय दूसरे स्कूलों से तीन शिक्षकों की संबद्धता का ग्रामीणों ने विरोध किया है। रविवार को तीसरे दिन धरना दे रहे भिंगराड़ा के नागरिकों ने कहा कि यहां शिक्षकों के खाली पदों पर पूर्ण तैनाती की जाए, न कि किसी दूसरे स्कूल से संबद्धीकरण। कहा कि शिक्षा विभाग ऐसा कर समाधान के बजाय दो गांवों के बीच विवाद पैदा कर रहा है। बालातड़ी से तीन शिक्षकों को हफ्ते में दो दिन भिंगराड़ा संबद्ध करने का विभाग ने आदेश जारी किया है।
भिंगराड़ा के ऐड़ीदेवता मंदिर परिसर में अभिभावक-शिक्षक संघ के अध्यक्ष सतीश भट्ट के नेतृत्व में दीपक शर्मा, भैरव दत्त शर्मा, नित्यानंद भट्ट, देवी दत्त भट्ट ने धरना दिया।
पीएलवी उमेश चंद्र भट्ट आदि अभिभावकों ने कहा कि प्रधानाचार्य सहित शिक्षकों के आठ पदों की कमी सैकड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य चौपट कर रही है। ग्रामीणों ने भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप देने की चेतावनी दी। सतीश भट्ट, मोहन महराना, देवकीनंदन भट्ट, नित्यानंद, किशोर शर्मा, चंदन बोहरा, अशोक चंद्र, दीपक चंद्र आदि ने धरने का समर्थन किया।
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खाली हैं ये पद
प्रवक्ता - रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, गणित, संस्कृत।
सहायक शिक्षक - अंग्रेजी, गणित, विज्ञान।
मुख्यालय के जीजीआईसी के भी बुरे हाल
चंपावत। यहां से 61 किमी दूर भिंगराड़ा के हाल तो बुरे हैं ही, जिला मुख्यालय के जीजीआईसी में हालात बेहतर नहीं हैं। जीजीआईसी चंपावत की 500 से अधिक छात्राओं को पढ़ाने के लिए भी सरकार शिक्षिकाएं नहीं दे पा रही है। छह प्रवक्ताओं और चार एलटी शिक्षिकाओं की कमी मुश्किल बनी है। अब अभिभावकों ने पदों को भरने की मांग की है।
जीजीआईसी इंटर में सिर्फ चार विषयों (भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, मनोविज्ञान, गृहविज्ञान) की प्रवक्ता हैं। वहीं एलटी में भी 11 में से सात ही पद भरे जा सके हैं।
भुवन चंद्र पांडेय सहित कई अभिभावकों का कहना है कि पहले कोरोना और बाद में शिक्षिकाओं की कमी पढ़ाई में बाधक बन रही है। प्रधानाचार्या निधि सक्सेना का कहना है कि शिक्षिकाओं के खाली पदों की वजह से पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।
कई बार इसके लिए उच्चाधिकारियों से आग्रह किया जा चुका है। वहीं सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि जीजीआईसी में शिक्षिकाओं की तैनाती के लिए महानिदेशालय को पत्र भेजा गया है।
जीजीआईसी चंपावत में शिक्षिकाओं के खाली पद
प्रवक्ता - हिंदी, अंग्रेजी, गणित, जीव विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल।
एलटी शिक्षिका - विज्ञान, गृह विज्ञान, भाषा, सामान्य।
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भिंगराड़ा के ऐड़ीदेवता मंदिर परिसर में अभिभावक-शिक्षक संघ के अध्यक्ष सतीश भट्ट के नेतृत्व में दीपक शर्मा, भैरव दत्त शर्मा, नित्यानंद भट्ट, देवी दत्त भट्ट ने धरना दिया।
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पीएलवी उमेश चंद्र भट्ट आदि अभिभावकों ने कहा कि प्रधानाचार्य सहित शिक्षकों के आठ पदों की कमी सैकड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य चौपट कर रही है। ग्रामीणों ने भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप देने की चेतावनी दी। सतीश भट्ट, मोहन महराना, देवकीनंदन भट्ट, नित्यानंद, किशोर शर्मा, चंदन बोहरा, अशोक चंद्र, दीपक चंद्र आदि ने धरने का समर्थन किया।
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खाली हैं ये पद
प्रवक्ता - रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, गणित, संस्कृत।
सहायक शिक्षक - अंग्रेजी, गणित, विज्ञान।
मुख्यालय के जीजीआईसी के भी बुरे हाल
चंपावत। यहां से 61 किमी दूर भिंगराड़ा के हाल तो बुरे हैं ही, जिला मुख्यालय के जीजीआईसी में हालात बेहतर नहीं हैं। जीजीआईसी चंपावत की 500 से अधिक छात्राओं को पढ़ाने के लिए भी सरकार शिक्षिकाएं नहीं दे पा रही है। छह प्रवक्ताओं और चार एलटी शिक्षिकाओं की कमी मुश्किल बनी है। अब अभिभावकों ने पदों को भरने की मांग की है।
जीजीआईसी इंटर में सिर्फ चार विषयों (भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, मनोविज्ञान, गृहविज्ञान) की प्रवक्ता हैं। वहीं एलटी में भी 11 में से सात ही पद भरे जा सके हैं।
भुवन चंद्र पांडेय सहित कई अभिभावकों का कहना है कि पहले कोरोना और बाद में शिक्षिकाओं की कमी पढ़ाई में बाधक बन रही है। प्रधानाचार्या निधि सक्सेना का कहना है कि शिक्षिकाओं के खाली पदों की वजह से पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।
कई बार इसके लिए उच्चाधिकारियों से आग्रह किया जा चुका है। वहीं सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि जीजीआईसी में शिक्षिकाओं की तैनाती के लिए महानिदेशालय को पत्र भेजा गया है।
जीजीआईसी चंपावत में शिक्षिकाओं के खाली पद
प्रवक्ता - हिंदी, अंग्रेजी, गणित, जीव विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल।
एलटी शिक्षिका - विज्ञान, गृह विज्ञान, भाषा, सामान्य।